(SIP Delay Big Losses/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: SIP Delay Big Losses: कई युवा नौकरीपेशा लोग करियर की शुरुआत में निवेश को प्राथमिकता नहीं देते। वे खर्चों जैसे नया फोन, घूमना-फिरना और लाइफस्टाइल पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उनका मानना होता है कि सैलरी बढ़ने के बाद वे आसानी से निवेश शुरू कर देंगे। लेकिन इसी सोच कारण वह समय पर सबसे बड़ा फायदा यानी चक्रवृ्द्धि (कंपाउंडिंग) का अवसर खो देते हैं।हैं।
अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में हर महीने 10,000 रुपये की SIP शुरू करता है तो 60 साल की उम्र तक वह लगभग 5.5 करोड़ रुपये का फंड बना सकता है। लेकिन यदि वही व्यक्ति 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है तो उसे रिटायरमेंट तक करीब 2.42 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों स्थितियों में निवेश का अंतर सिर्फ लगभग 6 लाख रुपये का होता है।
25 साल की उम्र में कई लोगों की नौकरी शुरू होती है और आमतौर पर उनकी सैलरी लगभग 50,000 रुपये होती है। इस समय उन पर ज्यादा जिम्मेदारियां नहीं होतीं। इसलिए वे आसानी से 10,000 रुपये बचा सकते हैं। लेकिन अक्सर वे अपनी कमाई को तुरंत खर्च कर देते हैं और निवेश को टाल देते हैं। उन्हें लगता है कि भविष्य में बेहतर कमाई होने पर वे निवेश शुरू करेंगे।
30 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सैलरी भले ही 1 लाख रुपये तक हो जाए लेकिन जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। शादी, घर खरीदना और बच्चों की पढ़ाई जैसे खर्च सामने आने लगते हैं। इस वजह से लोग निवेश तो शुरू करते हैं। लेकिन वह 5 साल की देरी से होता है। जिससे उन्हें कंपाउंडिंग का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
कंपाउंडिंग का मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगता है। जितना ज्यादा समय मिलेगा, उतना ही ज्यादा पैसा बढ़ेगा। 25 साल की उम्र में किया गया निवेश 35 साल तक बढ़ता है। जबकि 30 साल में शुरू किया गया निवेश केवल 30 साल तक ही बढ़ पाता है। इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि निवेश में राशि से ज्यादा महत्वपूर्ण समय होता है और जल्दी शुरुआत करना सबसे बड़ा फायदा देता है।