टाटा-एयरबस हेलीकॉप्टर इकाई उच्च स्तरीय विनिर्माण में साझेदारी का उज्ज्वल उदाहरण है : राजनाथ

टाटा-एयरबस हेलीकॉप्टर इकाई उच्च स्तरीय विनिर्माण में साझेदारी का उज्ज्वल उदाहरण है : राजनाथ

टाटा-एयरबस हेलीकॉप्टर इकाई उच्च स्तरीय विनिर्माण में साझेदारी का उज्ज्वल उदाहरण है : राजनाथ
Modified Date: February 17, 2026 / 08:56 pm IST
Published Date: February 17, 2026 8:56 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

कोलार (कर्नाटक), 17 फरवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि एच-125 हेलीकॉप्टर कार्यक्रम में निवेश 1,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की ‘‘संभावना’’ है और इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने इसे उच्च-स्तरीय विनिर्माण क्षेत्र में मित्र देशों के साथ पारस्परिक लाभकारी साझेदारी का ‘‘उज्ज्वल उदाहरण’’ बताया।

वह यहां एच-125 हेलीकॉप्टरों के कलपुर्जों को जोड़ने संबंधी इकाई के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मुंबई से वर्चुअल माध्यम से इस जिले के वेगल औद्योगिक क्षेत्र में टाटा-एयरबस सुविधा में एयरबस एच-125 हल्के हेलीकॉप्टरों के कलपुर्जों को जोड़ने संबंधी इकाई का उद्घाटन किया।

राजनाथ सिंह ने अपनी फ्रांसीसी समकक्ष कैथरीन वॉट्रिन के साथ परियोजना के उद्घाटन पर ‘टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स’ और ‘एयरबस हेलीकॉप्टर्स’ को बधाई दी तथा उनके पूर्व सहयोग को भी याद किया।

उन्होंने कहा, ‘‘यह परियोजना उच्च-स्तरीय विनिर्माण क्षेत्र में मित्र देशों के साथ पारस्परिक लाभकारी साझेदारी का उज्ज्वल उदाहरण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एच-125 कार्यक्रम में निवेश 1,000 करोड़ रुपये से अधिक होने की संभावना है और इससे हमारे कुशल और मेहनती युवा वर्ग के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।’’

सिंह ने बताया कि अपनी असाधारण विश्वसनीयता, बहुउपयोगिता और विभिन्न परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध एच-125 दुनिया के सबसे प्रभावी और भरोसेमंद सिंगल-इंजन हेलीकॉप्टरों में से एक साबित हुआ है।

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस ने इससे पहले गुजरात के वडोदरा में सी-295 विमान परियोजना के लिए भी साझेदारी की थी। उन्होंने इसे इस बात का प्रतीक बताया कि टाटा विशेष रूप से और भारत सामान्य रूप से अंतरराष्ट्रीय ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) के साथ सहयोग कर एक मजबूत भारत के दृष्टिकोण में योगदान दे सकता है।

उन्होंने कहा कि 2014 से ‘‘मेक इन इंडिया’’ और आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक नीति के मुख्य आधार रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत भारत महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और उच्च-स्तरीय उत्पादों व उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रतिबद्ध है, जो पारस्परिक लाभकारी साझेदारियों के माध्यम से संभव हो रहा है।

सिंह ने बताया कि सरकार का ध्यान छोटे और मध्यम उद्योगों को समर्थन देने और विशेष रूप से स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने पर भी रहा है। समग्र रूप से औद्योगिक विकास का लक्ष्य न केवल घरेलू मांग को पूरा करना है बल्कि अन्य देशों की जरूरतों को भी पूरा करना है।

रक्षा क्षेत्र में सुधारों पर प्रकाश डालते हुए सिंह ने कहा कि इन उपायों से रक्षा औद्योगिक प्रणाली में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारतीय रक्षा उत्पादन मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र केंद्रित रहा है क्योंकि इसमें भारी पूंजी निवेश और लंबे समय की आवश्यकता होती है, जिससे निजी क्षेत्र का योगदान अपेक्षा से कम रहा।

हालांकि, आयुध कारखानों के निगमीकरण, रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना और अन्य पहलों के जरिए निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़ाने के प्रयासों से अब यह देश के कुल रक्षा उत्पादन का लगभग एक-चौथाई हो गई है।

उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात भी कई गुना बढ़ा है, जिससे भारत दुनिया के शीर्ष निर्यातकों में शामिल हो गया है।

सिंह ने बताया कि इस विकास से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) और सहायक क्षेत्रों को भी बड़ा बढ़ावा मिला है, जिनकी संख्या अब 16,000 से अधिक हो गई है और कई विदेशी कंपनियां भारतीय एमएसएमई से घटक सामग्री खरीद रही हैं।

उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे सार्थक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए साझेदारी को और गहरा करें तथा अन्य देशों की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मंच उपलब्ध कराएं।

इस कार्यक्रम में उपस्थित केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने कहा कि टाटा और एयरबस द्वारा स्थापित एच125 के कलपुर्जों को जोड़ने की इकाई भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए एक निर्णायक क्षण है और यह भारत की उच्च-सटीक एयरोस्पेस क्षमताओं में बढ़ते विश्वास का ‘‘गौरवपूर्ण प्रतीक’’ है।

उन्होंने रक्षा और नागरिक उड्डयन को ‘‘भारत-फ्रांस साझेदारी के दो रणनीतिक स्तंभ’’ बताया और कहा कि यह नयी सुविधा नागरिक और रक्षा दोनों कलपुर्जों को जोड़कर एकीकृत एयरोस्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगी।

उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के तहत भारत ‘‘सिर्फ ऊंची उड़ान नहीं भर रहा, बल्कि सभी सीमाओं से आगे निकल रहा है।’’

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक (एमडी) सुकर्ण सिंह ने कहा कि इस सुविधा में ‘‘हम बिना किसी सरकारी या रक्षा आदेश के हेलीकॉप्टर बनाना शुरू करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, हम रक्षा बलों को आपूर्ति करने के लिए तैयार रहेंगे जब भी वे चाहेंगे। पहला हेलीकॉप्टर इस इकाई से 2027 के मध्य तक उड़ान भरेगा।’’

भाषा

गोला माधव

माधव


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