वो 13 मिनट की उड़ान जिससे वैश्विक हवाईमेल सेवा की शुरुआत का केंद्र बना भारत
वो 13 मिनट की उड़ान जिससे वैश्विक हवाईमेल सेवा की शुरुआत का केंद्र बना भारत
(जेमिना रमण)
चेन्नई, 18 फरवरी (भाषा) आज से ठीक 115 वर्ष पहले, 18 फरवरी 1911 की एक ठंडी सुबह, फ्रांसीसी नागरिक हेनरी पेक्वेट (23) एक हंबर बाइप्लेन विमान के खुले कॉकपिट में बैठे। उनका विमान जैसे ही यमुना नदी के किनारों के ऊपर से उड़ा, इंजन की तेज आवाज ने एक नये युग की शुरुआत की घोषणा कर दी। उसी दिन भारत वैश्विक हवाईमेल सेवा की शुरुआत का केंद्र बना और दुनिया में हवाई डाक क्रांति का आगाज हुआ।
आज, 18 फरवरी को विश्व हवाईमेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन उस ऐतिहासिक 13 मिनट की उड़ान की याद में मनाया जाता है, जो इलाहाबाद से नैनी के बीच पूरी की गई थी।
आज भले ही हम तुरंत डिजिटल संदेशों के दौर में जी रहे हैं, लेकिन हवाई डाक से जुड़े डाक टिकटों, लिफाफों और दस्तावेजों का संग्रह और अध्ययन करने वाले एक बार फिर से भारत की ओर देख रहे हैं क्योंकि वही वह क्षण था जब संचार के क्षेत्र में एक इतिहास रचा गया था।
बेंगलुरु के रहने वाले पीयूष खैतान एक उत्साही संग्रहकर्ता और रॉयल फिलैटेलिक सोसाइटी लंदन के फेलो हैं। उनके लिए वे 13 मिनट एक जीवनभर की सूक्ष्म और शोधपूर्ण खोज का प्रतीक हैं। उनके लिए वह केवल एक उड़ान नहीं, बल्कि इतिहास की गहराई में जाकर तथ्यों और दस्तावेजों की बारीकी से जांच-पड़ताल करने का एक निरंतर सफर है।
फिनटेक कंपनी नियोग्रोथ क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और प्रबंध निदेशक पीयूष खैतान पिछले लगभग 20 वर्षों से इस ऐतिहासिक उड़ान से जुड़े दस्तावेजों और सामग्री की पड़ताल कर रहे हैं। विशेष तौर पर डाक पत्रों पर इस्तेमाल की गई काली रंग की स्याही वाली मुहर ‘ब्लैक कैशे’ की।
यह दुर्लभ मुहर उस पहली हवाई डाक उड़ान से जुड़ी विशेष पहचान मानी जाती है और संग्रहकर्ताओं के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
पीयूष खैतान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अप्रशिक्षित नजर को ब्लैक कैशे सिर्फ अलग स्याही की छाप लग सकती है, लेकिन यह 1911 की प्रथम हवाई डाक की सबसे दुर्लभ और बेहद चुनिंदा तौर पर इस्तेमाल की गई मुहर है।’’
उस दिन परिवहन किये गए करीब 6,500 पत्रों में से अधिकतर पर मैजेंटा रंग की मुहर लगाई गई थी, लेकिन पीयूष खैतान की तैयार की गई गणना सूची में अब तक केवल 22 विशिष्ट ब्लैक कैशे नमूनों की पुष्टि हुई है।
उन्होंने कहा, “पहले के शोध में ऐसे सिर्फ नौ उदाहरण बताए गए थे, लेकिन उनका दस्तावेजी रिकॉर्ड बिखरा हुआ था। ये विवरण नीलामी अभिलेखों और निजी संग्रहों में बिना प्रमाणित जानकारी के रूप में मौजूद थे।”
उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि ये ब्लैक कैशे संभवतः प्रमुख हस्तियों के लिए सुरक्षित रखे गए थे। इससे संकेत मिलता है कि हवाई डाक सेवा की शुरुआत के समय ही इनका उपयोग नियंत्रित और चुनिंदा तरीके से किया गया था।
खैतान के अनुसार, इलाहाबाद का चयन किसी भव्य औपनिवेशिक योजना का हिस्सा नहीं था, बल्कि व्यावहारिक अवसर का परिणाम था। उन्होंने कहा, “यूनाइटेड प्रोविंसज एक्जीबिशन ने संचालित उड़ान का प्रदर्शन करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया।”
खैतान के मुताबिक, हंबर मोटर कंपनी के कैप्टेन डब्ल्यू विंडम अपने विमान को प्रचारित करने के इच्छुक थे और डाक उड़ान उन्हें प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा — दोनों दिला सकती थी।
भाषा अमित मनीषा
मनीषा

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