प्रश्न पत्र लीक से संबंधित 2024 के कानून में 10 साल की जेल, एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान

प्रश्न पत्र लीक से संबंधित 2024 के कानून में 10 साल की जेल, एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान

प्रश्न पत्र लीक से संबंधित 2024 के कानून में 10 साल की जेल, एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान
Modified Date: July 24, 2026 / 04:52 pm IST
Published Date: July 24, 2026 4:52 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जुलाई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की घोषणा के कुछ घंटे बाद शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्न पत्र लीक के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान करने वाले एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी।

केंद्र ने इससे पहले वर्ष 2024 में भी इस संबंध में एक नया कानून लाया था।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को मंजूरी देने के करीब चार महीने बाद, जून 2024 में इसे अधिसूचित किया गया था। उस समय राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर देशभर में व्यापक आक्रोश था।

इस कानून से पहले केंद्र सरकार तथा उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अपनाए जाने वाले अनुचित साधनों या संबंधित अपराधों से निपटने के लिए कोई विशेष और व्यापक कानून नहीं था।

इस अधिनियम का उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाओं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) सहित केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाना है।

पहले के कानून में, नकल और अन्य अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए दोषियों को कम से कम तीन से पांच वर्ष के कारावास का प्रावधान किया गया था। वहीं, नकल कराने वाले गिरोहों या संगठित अपराध में शामिल लोगों के लिए पांच से 10 वर्ष तक की कैद और कम से कम एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान था।

इस कानून में लोक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा अन्य सरकारी एजेंसियों की सेवाएं लेने, मानक एवं दिशानिर्देश तैयार करने तथा अनुचित साधनों के इस्तेमाल या अपराध की घटनाएं दर्ज करने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए थे।

इसके अलावा, परीक्षा से पहले और बाद की विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए भी दिशानिर्देश निर्धारित किए गए थे। इनमें परीक्षा केंद्रों की तैयारियों का पूर्व ऑडिट, अभ्यर्थियों का प्रवेश, बायोमेट्रिक पंजीकरण, सुरक्षा जांच, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र तैयार करना और अपलोड करना, परीक्षा के दौरान निगरानी, परीक्षा के बाद की गतिविधियां तथा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए लेखक उपलब्ध कराने संबंधी दिशानिर्देश शामिल थे।

कानून में 15 प्रकार के अवैध कृत्यों को परिभाषित किया गया है। इनमें प्रश्नपत्र लीक करना, ओएमआर शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट बनाना और फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना शामिल है।

नीट-यूजी परीक्षा को लेकर छात्रों के नेतृत्व में हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। प्रश्नपत्र लीक, प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही की मांग को लेकर यह आंदोलन देशव्यापी स्वरूप ले चुका है।

विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग के साथ-साथ संसद में इस विषय पर चर्चा कराने की भी मांग कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार देर रात प्रदर्शनकारी छात्रों के नाम जारी एक वीडियो संदेश में कहा था कि प्रश्नपत्र लीक के मामलों में कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करने वाला विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में