नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम-जी अधिनियम के तहत तीन तरह के नियम अधिसूचित किए हैं, जिनमें मनरेगा से नए कानून में बदलाव की प्रक्रिया, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान तथा केंद्र की ओर से तय मानक आवंटन से अधिक खर्च के नियम तय किए गए हैं। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने एक जुलाई की अलग-अलग राजपत्र अधिसूचनाओं के जरिए इन नियमों को जारी किया है। इनके प्रकाशित होने की तारीख से ही ये लागू हो गए हैं। इन नियमों का मसौदा मई में जारी किया गया था और सरकार ने इस पर लोगों से सुझाव भी मांगे थे।
बदलाव से जुड़े नियमों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से नए रोजगार गारंटी ढांचे विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम-जी अधिनियम) में व्यवस्थित तरीके से बदलाव की व्यवस्था की गई है।
इन नियमों के तहत राज्य सरकारों को 30 जून तक मनरेगा के तहत मौजूद सभी देनदारियों का सत्यापन करना होगा, तय बकाया राशि का भुगतान करना होगा और 180 दिन में ऑडिट उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना होगा। विशेष परिस्थितियों में केंद्र सरकार दर्ज कारणों के आधार पर इस अवधि को 90 दिन बढ़ा सकती है।
केंद्र सरकार 30 जून तक की देनदारियों के लिए वित्तीय सहायता जारी रखेगी। साथ ही, राज्यों को तब तक अंतरिम आवंटन दिया जाएगा, जब तक मानक आवंटन से जुड़े अंतिम नियम तय नहीं हो जाते।
नियमों में यह भी कहा गया है कि मनरेगा के तहत जारी कार्य नए कानून के तहत भी जारी रहेंगे। ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक राज्य सरकारें नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं कर देतीं।
दूसरी अधिसूचना में वीबी-जी राम-जी अधिनियम के तहत मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान का तरीका तय किया गया है।
इसके अनुसार, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते का भुगतान केवल प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए लाभार्थियों के बैंक या डाकघर खातों में किया जाएगा।
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित असाधारण परिस्थितियों को छोड़कर नकद भुगतान पर रोक रहेगी। सभी भुगतान योजना की प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य डिजिटल मंच के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किए जाएंगे।
तीसरी अधिसूचना में केंद्र सरकार के राज्यवार मानक आवंटन से अधिक खर्च और बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए धन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तय की गई है।
इसके तहत बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि राज्यों द्वारा स्वीकृत मानक आवंटन से अधिक किए गए खर्च का रिकॉर्ड निर्धारित एमआईएस में दर्ज करना होगा।
नियमों के अनुसार, खर्च का विवरण मदवार और स्रोतवार देना होगा, ताकि केंद्र सरकार द्वारा वहन किए गए खर्च और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए खर्च में स्पष्ट अंतर किया जा सके। यह सभी जानकारी योजना के लेखा-परीक्षण और वित्तीय प्रबंधन रिकॉर्ड का हिस्सा होगी।
इन अधिसूचनाओं के जरिए वीबी-जी राम-जी अधिनियम के महत्वपूर्ण प्रावधानों को लागू किया गया है। यह कानून एक जुलाई से पूरे देश में लागू हो गया है और इसके साथ ही मनरेगा व्यवस्था की जगह ग्रामीण रोजगार और आजीविका गारंटी की नयी व्यवस्था ने ले ली है।
भाषा जोहेब माधव
माधव