कॉजपा ने मंगलवार तक लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी

कॉजपा ने मंगलवार तक लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी

कॉजपा ने मंगलवार तक लिखित आश्वासन नहीं मिलने पर फिर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी
Modified Date: July 27, 2026 / 10:26 pm IST
Published Date: July 27, 2026 10:26 pm IST

नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर सरकार प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ कोई नयी प्राथमिकी दर्ज नहीं करने तथा आपराधिक मामलों को वापस लेने की गारंटी वाला लिखित आश्वासन मंगलवार तक नहीं देती है, तो वह अपना आंदोलन फिर से शुरू करेगी।

कॉजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिन तक चले प्रदर्शन को 25 जुलाई को समाप्त करने से पहले सरकार के साथ हुई तीसरे दौर की वार्ता में इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।

रांका ने कहा, ‘‘तीसरे दौर की वार्ता में हमारे बीच यह सहमति बनी थी कि देशभर में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी और भविष्य में किसी भी आयोजक या प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई नई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी।’

उन्होंने कहा कि कॉजपा ने केंद्रीय मंत्रियों जे पी नड्डा और जितेंद्र सिंह को समझौते का एक मसौदा सौंपा था और इस बात को लेकर सहमति बनी थी कि कानूनी परामर्श के बाद सरकार मंगलवार तक लिखित समझौता साझा करेगी।

उन्होंने कहा, ‘हम सरकार द्वारा लिखित समझौता साझा किए जाने का इंतजार कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री समझौते का सम्मान करेंगे और सभी प्राथमिकी वापस ली जाएंगी, किसी प्रदर्शनकारी या आयोजक को परेशान नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।’

रांका ने कहा कि अगर मंगलवार तक लिखित समझौता नहीं मिला तथा आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों और आयोजकों को रिहा नहीं किया गया, तो कॉजपा को ‘फिर से विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।’

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया और प्रदर्शन को एक ‘‘स्वाभाविक’’ प्रदर्शन बताया। उन्होंने कहा कि उसमें शामिल छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने मामलों का सामना कर रहे लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये के योगदान की घोषणा की।

सिब्बल ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यह एक स्वाभाविक आंदोलन था।’

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधिक नेटवर्क देशभर के उन वकीलों को एक साथ जोड़ेगा, जो छात्रों और प्रदर्शनकारियों का निःशुल्क प्रतिनिधित्व करने के इच्छुक हैं।

उन्होंने कहा, ‘कॉजपा एक व्यवस्था और एक वेबसाइट बनाएगी, जहां विभिन्न जिलों के वकील मदद के लिए अपना पंजीकरण करा सकेंगे। मैं अपनी ओर से एक करोड़ रुपये का योगदान दूंगा और देशभर के वकीलों से इस कोष में योगदान देने का अनुरोध करूंगा।’

सिब्बल ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद प्रदर्शनकारियों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस इसमें शामिल हुए व्यक्तियों की पहचान के लिए चेहरे की पहचान तकनीक का इस्तेमाल कर रही है और मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, ‘मेरी भूमिका बाहर से इस मामले में कानूनी समर्थन देने की है।’

कॉजपा के मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि कॉजपा ने सरकार द्वारा उनकी प्रमुख मांगों पर कार्रवाई करने या तय समयसीमा के भीतर कदम उठाने के आश्वासन के बाद ‘भरोसे के आधार पर’ अपना प्रदर्शन समाप्त किया था।

उन्होंने कहा कि कॉजपा यह सुनिश्चित करने के लिए आंदोलन समाप्त करने से पहले और बाद में सिब्बल के संपर्क में रहा कि मुकदमों या लक्षित कार्रवाई के जरिए युवा आंदोलन को कमजोर न किया जा सके।

दास ने कहा, ‘हमें लगा कि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सरकार लोगों को व्यक्तिगत स्तर पर निशाना बना सकती है। कॉजपा पहले दिन से ही छात्रों को कानूनी और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करा रही है और उसने सिब्बल से मार्गदर्शन मांगा।’

उन्होंने यह भी घोषणा की कि कॉजपा देशभर के छात्रों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के इच्छुक वकीलों से जोड़ने के लिए एक राष्ट्रव्यापी पोर्टल शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि एक अन्य पोर्टल ‘साक्षी’ भी शुरू किया गया है, जहां प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और बयान एकत्र किए जाएंगे।

दास ने कहा, ‘जो पुलिस अधिकारी और आरएएफ कर्मी प्रदर्शनकारियों को पीटने के इरादे से आए थे, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। अगर लोगों के पास वीडियो या तस्वीरें हैं तो वे उन्हें पोर्टल पर अपलोड करें और हमारी कानूनी टीम इस मामले को आगे बढ़ाएगी।’

कॉजपा की कानूनी संपर्क अधिकारी के रूप में पेश की गईं रत्ना सिंह ने कहा कि असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की मदद पहले से ही वकीलों द्वारा की जा रही है।

उन्होंने दावा किया कि कोलकाता में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से 10 मुस्लिम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों के खिलाफ गुंडा अधिनियम समेत कड़े प्रावधान लगाए जाने की संभावना है।

उन्होंने बिहार के पटना, सीवान और छपरा में भी पुलिस की कथित ज्यादती का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हत्या के प्रयास के आरोप लगाए गए हैं और करीब 5,000 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।

कॉजपा ने जंतर-मंतर पर 36 दिन से जारी अपना आंदोलन शनिवार को समाप्त कर दिया था। यह फैसला सरकार द्वारा उसकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद लिया गया, जिनमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्राथमिकी वापस लेना, बदले की कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन और व्यापक परीक्षा सुधारों पर विचार करने की प्रतिबद्धता शामिल थी।

सरकार ने कानूनी परामर्श के बाद मंगलवार तक सहमति पत्र (समझौते) का लिखित मसौदा साझा करने पर भी सहमति जताई थी।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


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