न्यायालय 17 अगस्त को ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन अधिनियम के खिलाफ सभी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा

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न्यायालय 17 अगस्त को ट्रांसजेंडर व्यक्ति संशोधन अधिनियम के खिलाफ सभी याचिकाओं पर सुनवाई करेगा

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  • Publish Date - August 3, 2026 / 04:36 PM IST,
    Updated On - August 3, 2026 / 04:36 PM IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026’ की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं पर 17 अगस्त को अंतिम सुनवाई करेगा। साथ ही, न्यायालय ने उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों को लेकर चिंता जताई, जिन्होंने पिछली व्यवस्था के तहत पहचान पत्र हासिल किए थे।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस संबंध में आदेश जारी किया।

न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि पीठ को खास तौर पर उन ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की चिंता है, जिन्हें पहले के कानून के तहत ट्रांसजेंडर (टीजी) पहचान पत्र जारी किए जा चुके थे।

याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुईं, वरिष्ठ वकील जयना कोठारी ने कहा कि जब याचिकाएं दायर की गईं, तो सरकार ने एक गजट अधिसूचना जारी करके संशोधित कानून को 25 मई से लागू कर दिया।

वरिष्ठ वकील ने कहा कि ट्रांसजेंडर लोगों के लिए बना राष्ट्रीय पोर्टल, जिसके जरिए वे अपने पहचान पत्र हासिल करते हैं, काम नहीं कर रहा है।

उन्होंने पीठ से आग्रह किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पूर्व कानून के तहत पहले से ही टीजी कार्ड प्राप्त कर चुके व्यक्तियों को उनके मौजूदा अधिकारों से वंचित न किया जाए।

उन्होंने याचिकाओं के निपटारे तक ऐसे कार्डों की वैधता पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की।

दूसरे याचिकाकर्ताओं ने भी अपने वकीलों के जरिए, संशोधित कानून को लागू करने से कथित तौर पर पैदा होने वाली व्यावहारिक दिक्कतों की ओर इशारा किया।

मद्रास उच्च न्यायालय की एक ट्रांसजेंडर वकील ने कहा कि उन्हें शहर में रहने के लिए जगह पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और अक्सर सुनवाई के दौरान अदालत की पीठ उन्हें ‘पुरुष’ के तौर पर संबोधित करती हैं।

केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय मांगा और पीठ से आग्रह किया कि मामले की अंतिम सुनवाई की जाए।

विधि अधिकारी ने कहा कि कई जटिल कानूनी सवालों की जांच करनी होगी, जिनमें उत्तराधिकार से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

इससे पहले दिन में, पीठ ने केरल के एक ट्रांसजेंडर की नई याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया। इस ट्रांसजेंडर ने पुरुषों के लिए आरक्षित पुलिस उपनिरीक्षक पद के लिए आवेदन करने के वास्ते केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी।

पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलों को मान लिया और केंद्र को नोटिस जारी करते हुए इस याचिका को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया।

इससे पहले, पीठ ने केंद्र सरकार से उस याचिका पर जवाब मांगा था जिसमें ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026’ की धारा 2(के) के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी; आरोप है कि यह प्रावधान “ट्रांसजेंडर व्यक्ति” की कानूनी परिभाषा को सीमित करता है।

भाषा प्रशांत दिलीप

दिलीप