Asia First Telecom Manufacturing Zone: प्रदेश में बनेगा एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन.. 5500 करोड़ का निवेश और इतने हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

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ग्वालियर में एशिया का पहला टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन विकसित किया जा रहा है। पहले चरण के लिए करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित है और 24 कंपनियों ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। परियोजना में करीब ₹5,500 करोड़ निवेश और 18 हजार से अधिक रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।

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  • Publish Date - September 20, 2026 / 11:40 PM IST,
    Updated On - September 20, 2026 / 11:44 PM IST

Asia First Telecom Manufacturing Zone in Gwalior || Image- IBC24 News File

HIGHLIGHTS
  • ग्वालियर में एशिया का पहला TMZ
  • 24 कंपनियों ने आवेदन प्रक्रिया शुरू की
  • 18 हजार से ज्यादा रोजगार के अवसर

Asia First Telecom Manufacturing Zone in Gwalior: नई दिल्ली: केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने रविवार को ग्वालियर के श्रीमंत माधवराव सिंधिया काउंटर मैग्नेट सिटी में प्रस्तावित टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के लिए चिन्हित जमीन का निरीक्षण किया। इस दौरान दूरसंचार विभाग के सचिव और सीनियर अफसर भी मौजूद रहें। सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में करीब 5,500 करोड़ रुपये के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद है और इससे 18 हजार से अधिक लोगों को डायरेक्ट रोजगार मिल सकेगा।

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सिंधिया ने कहा कि यह परियोजना केवल एक इंडस्ट्रियल यूनिट लगाने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद ग्वालियर में टेलीकॉम क्षेत्र का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है। इसके तहत करीब 24-25 टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की जाएंगी। यहां टेलीकॉम उपकरण और अलग-अलग प्रकार के कंपोनेंट तैयार किए जाएंगे। इससे ग्वालियर को टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग के बड़े सेंटर के तौर पर विकसित करने में मदद मिलेगी।

170 एकड़ जमीन चिन्हित

Asia First Telecom Manufacturing Zone in Gwalior: SADA में करीब 90 एकड़ से अधिक और IT पार्क में 70 एकड़ से अधिक, यानी कुल लगभग 170 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है। सिंधिया के मुताबिक प्रोजेक्ट में इन्वेस्टर्स की रुचि काफी अधिक है और जमीन की उपलब्धता से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। ऐसे में पहले स्टेज के विस्तार के लिए अतिरिक्त जमीन की पहचान की जाएगी।

24 कंपनियों ने शुरू की प्रक्रिया

जुलाई 2026 में दूरसंचार विभाग और मध्य प्रदेश सरकार के बीच समझौता हुआ था। इसके बाद अगस्त में दिल्ली और मुंबई में निवेशक रोडशो आयोजित किए गए। दिल्ली रोडशो में करीब 3,500 करोड़ रुपये और मुंबई रोडशो में करीब 2,000 करोड़ रूपये के इन्वेस्टमेंट प्रपोजल मिले थे। सिंधिया ने बताया कि ये केवल ऐलान नहीं हैं। अब तक 24 कंपनियों ने यूनिट लगाने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरकार देगी कई तरह की सुविधाएं

Asia First Telecom Manufacturing Zone in Gwalior: मध्य प्रदेश सरकार ने टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है। इसमें जमीन लीज, बिजली, रोजगार और उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन डेवलपमेंट को भी पैकेज में जगह दी गई है। इसके अलावा दूरसंचार विभाग करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से कॉमन टेस्टिंग लैब स्थापित करने का प्रस्ताव लेकर आया है।

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कनेक्टिविटी और तकनीकी मानव संसाधन पर जोर

सिंधिया ने कहा कि ग्वालियर की बेहतर कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल मानव संसाधन बड़ी ताकत होंगे। करीब 120 किलोमीटर लंबा आगरा-ग्वालियर हाई-स्पीड कॉरिडोर ग्वालियर को दिल्ली और उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों से जोड़ने में मदद करेगा। शहर प्रमुख रेलवे मार्गों से भी जुड़ा है। ग्वालियर एयरपोर्ट को करीब 650 करोड़ रुपये की लागत से 16 महीने में विकसित किया गया है। वहीं शहर के इंजीनियरिंग संस्थानों से हर साल करीब 25 हजार इंजीनियरिंग छात्र पढ़ाई पूरी करते हैं। इससे टेलीकॉम उद्योग को तकनीकी और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता में मदद मिलने की उम्मीद है।

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Q1. ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में कितना निवेश प्रस्तावित है?

Ans: परियोजना के लिए करीब ₹5,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं।

Q2. ग्वालियर TMZ से कितने रोजगार मिलने की उम्मीद है?

Ans: परियोजना से 18 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

Q3. ग्वालियर TMZ के लिए कितनी जमीन चिन्हित है?

Ans: पहले चरण के लिए SADA और IT पार्क में करीब 170 एकड़ जमीन चिन्हित है।

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