ईडी ने केरलम के डीजीपी को पत्र लिख विजयन व बेटी-दामाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया
ईडी ने केरलम के डीजीपी को पत्र लिख विजयन व बेटी-दामाद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया
(नीलाभ श्रीवास्तव)
कोच्चि/नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीएमआरएल कंपनी से जुड़े कथित रिश्वत मामले में केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद पी. ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र लिखा है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) के तहत यह पत्र भेजा है और इसमें उक्त मामले में की गई जांच के निष्कर्षों का हवाला दिया गया है।
जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं और कुछ अन्य कानूनों के तहत पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। एजेंसी का दावा है कि उसके पास कुछ आरोपियों के बयान हैं, जिनमें कहा गया है कि 81 वर्षीय नेता प्रतिपक्ष विजयन ने मुख्यमंत्री रहते हुए सीएमआरएल से अपनी बेटी के जरिए रिश्वत ली थी और रियास ने बाद में यह पैसा दुबई भेज दिया।
सूत्रों ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय ने कुल 13 संस्थाओं और व्यक्तियों को आरोपी बनाने की बात कही है, जिनमें विजयन परिवार के तीन सदस्य, वीणा की बंद हो चुकी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस, सीएमआरएल के प्रवर्तक एस. एम. शशिधरन कार्था, सीएमआरएल के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी पी. सुरेश कुमार, एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स नामक कंपनी, कुछ अन्य व्यक्ति और अज्ञात लोग शामिल हैं।
धन शोधन रोधी कानून की धारा 66 (2) ईडी को अपनी आपराधिक जांच के निष्कर्ष किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ साझा करने का अधिकार देती है, ताकि उसके आधार पर नयी प्राथमिकी या शिकायत दर्ज की जा सके। ऐसी पुलिस प्राथमिकी के आधार पर ईडी पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर सकती है।
सूत्रों ने बताया कि ईडी ने केरलम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रवाडा ए. चंद्रशेखर को पत्र लिखकर पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। ईडी का कहना है कि उसकी जांच के दौरान नामजद संस्थाओं के खिलाफ “सबूत” मिले हैं।
विजयन परिवार और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
हालांकि, माकपा के वरिष्ठ नेता विजयन ने पहले कहा था कि “वह निर्दोष हैं।”
उन्होंने कहा था कि राजनीति बदले की भावना से उनकी बेटी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
रियास ने कहा है कि वह और पार्टी ईडी के मामले का राजनीतिक व कानूनी, दोनों स्तरों पर सामना करेंगे। माकपा के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने आरोप लगाया कि ईडी रियास को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है।
केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को तिरुवनंतपुरम में कहा कि ईडी के पत्र पर गौर करके कानून के अनुसार फैसला लिया जाएगा।
राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सत्ता में है।
ईडी का आरोप है कि केरलम की खनन कंपनी ‘कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड’ (सीएमआरएल) ने वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को ‘आईटी कंसल्टेंसी सेवाओं’ के नाम पर कथित तौर पर 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी भुगतान किया था।
केंद्रीय एजेंसी ने जून में वीणा के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय वह राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम में किराये के मकान में विजयन के साथ रह रही थीं। इसके बाद ईडी ने उनसे पूछताछ भी की थी।
ईडी ने अगस्त में एक बयान में कहा था कि वीणा टी. के खिलाफ तलाशी के दौरान कुछ ‘‘हस्तलिखित’’ नोट जब्त किए थे। इन ‘नोट’ में दुबई में किए गए कुछ धन हस्तांतरण का विवरण दर्ज था।
ईडी ने दावा किया कि सीएमआरएल प्रबंधन और वीणा ने ‘‘अपराध से आय अर्जित’’ की।
मार्च 2024 में ईडी ने गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) द्वारा दर्ज शिकायत का संज्ञान लेने के बाद पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया था। एसएफआईओ कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच शाखा है। बाद में एसएफआईओ ने अप्रैल 2025 में एर्नाकुलम की एक अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) दाखिल की थी।
जनवरी 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी के बाद सीएमआरएल केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के घेरे में आया था। इस छापेमारी में कथित तौर पर 130 करोड़ रुपये के फर्जी खर्च का खुलासा हुआ था।
अदालत के दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने वित्त वर्ष 2012-13 से 2018-19 के बीच ‘परिवहन’ और ‘स्लज हैंडलिंग’ (औद्योगिक अवशेषों के प्रबंधन) मदों के तहत “फर्जी” नकद खर्च दर्ज करके अपने खर्च को 133.82 करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। इन खर्चों के जरिए जुटाई गई नकदी का इस्तेमाल नेताओं, राजनीतिक दलों, मीडिया संस्थानों और सरकारी कर्मचारियों को अवैध भुगतान करने के लिए किया गया।
अदालती दस्तावेजों में कहा गया है कि सीएमआरएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) और प्रबंध निदेशक ने कर अधिकारियों के समक्ष “स्वीकार किया” कि कारोबार सुचारू रूप से चलाने के लिए इस तरह के नकद भुगतान किए गए थे। उन्होंने कारोबार बंद होने और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने की आशंका के चलते ये भुगतान किए थे।
अधिकारियों ने बताया कि सीएमआरएल ने आयकर निपटान आयोग के समक्ष इन “फर्जी” खर्चों की बात “स्वीकार की” थी। इसके बाद एसएफआईओ में शिकायत दर्ज कराई गई।
एसएफआईओ ने अपनी अभियोजन शिकायत में कहा कि सीएमआरएल ने 15 वर्षों के दौरान विभिन्न लोगों को “रिश्वत” देने के लिए 182 करोड़ रुपये के काल्पनिक नकद खर्च किए। एसएफआईओ ने यह भी कहा कि कंपनी ने सीएमआरएल के प्रवर्तक एस. एन. शशिधरन कार्था और उनके परिवार के स्वामित्व वाली कंपनियों को परिवहन सेवाओं के लिए 91 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश

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