नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के चार जवानों के परिजनों ने शुक्रवार को कहा कि संसद में उनकी पीड़ा पर भी चर्चा होनी चाहिए।
परिजनों ने कहा कि अब तक इस पूरे घटनाक्रम पर हुई चर्चा मुख्य रूप से पुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर ही केंद्रित रही है।
परिजनों ने 20 जुलाई को आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा पर ‘‘अपना पक्ष’’ रखते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और उनके परिवारों की पीड़ा पर भी संसद में चर्चा की जानी चाहिए।
‘कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया’ में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) की पत्नी, एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) की पत्नी तथा दो घायल पुलिस अधिकारियों के बच्चों ने उन पलों को याद किया, जब वे अस्पतालों से आने वाले फोन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, खून से लथपथ अपने परिजनों को घर लौटते देखा था और बाद में सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चाएं देखीं जिसमें ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों की पीड़ा और चोटों की अनदेखी की गई।
अपने पति के घायल होकर घर लौटने की घटना को याद करते हुए एसीपी की पत्नी उपनीत कौर ने कहा कि वह रात उनके और उनकी दो वर्षीय बेटी के लिए ‘‘आघात पहुंचने’’ वाली थी।
उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने भीड़ से बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की थी, लेकिन प्रदर्शनकारियों की ओर से बोतलें, पत्थर, चप्पलें और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं।
उपनीत कौर ने कहा, “हर वर्दी के पीछे केवल एक पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि उसकी पत्नी, बच्चे, माता-पिता और पूरा परिवार होता है। हम चाहते हैं कि लोग इस बात को समझें।”
उन्होंने कहा कि हिंसा के बाद पुलिसकर्मियों के परिवार एक-दूसरे के साथ जुड़े और उन्होंने उन कठिन परिस्थितियों को साझा किया, जिनसे उन्हें गुजरना पड़ा।
भाषा नोमान खारी
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