हिप्र मंत्रिमंडल ने ‘चिट्टा’ तस्करों को पंचायत चुनावों में भाग लेने से रोकने का निर्णय लिया
हिप्र मंत्रिमंडल ने 'चिट्टा' तस्करों को पंचायत चुनावों में भाग लेने से रोकने का निर्णय लिया
शिमला, 23 मार्च (भाषा) हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सोमवार को चिट्टा (मिलावटी हेरोइन) की तस्करी में शामिल लोगों को आगामी पंचायत चुनावों में चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया।
यह निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया।
उन्होंने विधानसभा के मौजूदा सत्र में एक विधेयक पेश करने का निर्णय लिया, जो चिट्टा के व्यापार में शामिल लोगों को पंचायती राज चुनावों में चुनाव लड़ने से रोकता है।
राज्य में पंचायती राज चुनाव 31 मई से पहले संपन्न हो जाएंगे। राज्य में कुल 3,577 ग्राम पंचायतें हैं।
अधिकारियों के अनुसार, चिट्टा अत्यधिक खतरनाक और जानलेवा है, क्योंकि इसका सेवन समय के साथ बढ़ता जाता है और अधिक मात्रा में चिट्टा के सेवन से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।
पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि सरकार ऐसे प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है, जिनके तहत चिट्टा और एलएसडी जैसे रासायनिक मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में आरोपी व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों के दुरुपयोग के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए ऐसे व्यक्तियों को सत्ता और प्रभाव के पदों तक पहुंचने से रोकना अनिवार्य है।
उन्होंने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों के कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ कई मामलों में कार्रवाई शुरू की जा चुकी है, जबकि पुलिस मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान संचालित कर रही है।
उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव के संबंध में मुख्यमंत्री और संबंधित सरकारी विभागों से पहले ही चर्चा हो चुकी है। सरकार वर्तमान में इस उपाय को लागू करने के लिए आवश्यक विधायी प्रावधानों को तैयार करने पर काम कर रही है।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह नियम केवल पंचायती राज संस्थाओं तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे शहरी स्थानीय निकायों, विशेष रूप से नगर परिषदों और नगर निगमों के चुनावों पर भी समान रूप से लागू करने की योजना है।
भाषा
राखी दिलीप
दिलीप

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