भारतीय मिशन में वीजा सेवा निविदा रद्द करने संबंधी फैसले के खिलाफ याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी

भारतीय मिशन में वीजा सेवा निविदा रद्द करने संबंधी फैसले के खिलाफ याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी

भारतीय मिशन में वीजा सेवा निविदा रद्द करने संबंधी फैसले के खिलाफ याचिका पर सोमवार को सुनवाई होगी
Modified Date: July 17, 2026 / 02:31 pm IST
Published Date: July 17, 2026 2:31 pm IST

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका पर 20 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी, कुवैत, सिंगापुर और कैनबरा स्थित भारतीय मिशन में वाणिज्य दूतावास, पासपोर्ट और वीजा (सीपीवी) सेवाओं के ‘आउटसोर्सिंग’ के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा रद्द कर दी गई थी।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले के कारण इन स्थानों पर वीजा और अन्य सेवाएं प्रदान करने में कठिनाई उत्पन्न हो गई है।

प्रधान न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई सोमवार को करने पर सहमति जताई।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीपीवी सेवाओं की ‘आउटसोर्सिंग’ के लिए निजी कंपनियों को दी गई निविदा रद्द करते हुए केंद्र सरकार को नए अनुरोध प्रस्ताव जारी कर नयी बोलियां आमंत्रित करने का निर्देश दिया था।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए नयी निविदाएं जारी कर दी गई हैं, लेकिन कोई नयी एजेंसी तत्काल कामकाज शुरू नहीं कर सकती। इसके परिणामस्वरूप इन स्थानों पर ऐसी सेवाएं लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गई हैं।

अपने फैसले में उच्च न्यायालय ने कहा था कि केंद्र सरकार ने निर्णय लेते समय ऐसे तुलनात्मक मानकों का उपयोग किया जिनका खुलासा नहीं किया गया। पीठ ने कहा कि मूल्यांकन पत्र में न तो याचिकाकर्ताओं के प्रस्तावों की कमियों का उल्लेख किया गया और न ही यह बताया गया कि तुलनात्मक मानदंडों के तहत उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक देने के लिए कौन-से तुलनात्मक मानक अपनाए गए।

अदालत ने कहा था कि ये कमियां सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात करती हैं।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि अधिकारियों द्वारा याचिकाकर्ताओं को जिन मानकों पर अंक दिया गया, वह ‘‘मनमाना, अतार्किक’’ था और इसमें पारदर्शिता का अभाव था, जिसके कारण तकनीकी मूल्यांकन संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर टिक नहीं सकता।

अदालत ने कहा था कि संबंधित तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है।

इसने यह फैसला निविदा में असफल रहीं ई ट्रैव टेक लिमिटेड और वेरासिस लिमिटेड की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनाया।

दोनों कंपनियों ने निविदा प्रक्रिया में भाग लिया था, लेकिन तकनीकी मूल्यांकन चरण में उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया, क्योंकि वे वित्तीय बोलियां खोले जाने के लिए निर्धारित न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर सकी थीं।

इसके बाद दोनों कंपनियों ने उन्हें असफल घोषित करने संबंधी निर्णय को अदालत में चुनौती दी थी।

भाषा गोला नेत्रपाल

नेत्रपाल


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