शक्तिशाली इन रगों में बह रहा फौलाद है, भारत ने शौर्य के साथ मनाया आर्मी डे

शक्तिशाली इन रगों में बह रहा फौलाद है, भारत ने शौर्य के साथ मनाया आर्मी डे

शक्तिशाली इन रगों में बह रहा फौलाद है, भारत ने शौर्य के साथ मनाया आर्मी डे
Modified Date: November 29, 2022 / 08:31 pm IST
Published Date: January 15, 2018 6:30 am IST

15 जनवरी का दिन भारतीय सेना के स्वर्णिम इतिहास की एक अहम तारीख है। इसी तारीख को साल 1949 में फील्ड मार्शल के एम करियप्पा ने ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल फ्रांसिस बूचर से भारतीय थल सेना के कमांडर इन चीफ का प्रभार संभाला था। जनरल बूचर भारत में आखिरी ब्रिटिश कमांडर थे और जनरल करियप्पा प्रथम भारतीय थल सेना प्रमुख। इसी के साथ और इसी तारीख से भारतीय सेना पूरी तरह भारतीय सेना बन गई। 1776 में कोलकाता में पहली बार ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार ने भारतीय सेना का गठन किया था, लेकिन 15 जनवरी 1949 के बाद स्वतंत्र अस्तित्व कायम होने के बाद इसने एक ऐसी गौरवगाथा लिखी है, जिसपर आज हर भारतीय को गर्व है। इसी तारीख को देश सेना दिवस यानी आर्मी डे के रूप में मनाता है। दिल्ली के इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पहुंचकर तीनों सेना प्रेमुखों ने देश के शहीद सपूतों को नमन किया।

इसके बाद दिल्ली के करियप्पा परेड ग्राउंड पर आर्मी डे समारोह हुआ, जिसमें जनरल बिपिन रावत ने परेड का निरीक्षण किया।

 

 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज सुबह ट्वीट करके सेना दिवस की बधाई दी और कहा कि आप हमारे राष्ट्र के गौरव और हमारी आजादी के रखवाले हैं. हर भारतीय चैन की नींद सो सकता है, क्योंकि उसे भरोसा है कि आप चौकन्ने और सतर्क हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया- ‘सेना दिवस के मौके पर मैं जवानों और उनके परिवारों को बधाई देता हूं. भारत का हर नागरिक सेना पर यकीन रखता है, जो राष्ट्र की सुरक्षा में सदैव तत्पर रहती है. हमारी सेना हमेशा राष्ट्र को सर्वोपरि रखती है, राष्ट्रसेवा में प्राणों का बलिदान करने वाले सभी महान सपूतों को सैल्यूट, भारत कभी अपने नायकों को नहीं भूल सकता।

 

 

1776 में कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार के अधीन भारतीय सेना का गठन हुआ था। अभी देश भर में भारतीय सेना की 53 छावनियां और 9 आर्मी बेस हैं। भारतीय सेना न सिर्फ भारत की सरहदों की रक्षा में तैनात रहती है बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों के तहत दुनिया के किसी भी हिस्से में योगदान देती रही है। इतना ही नहीं, प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में देश के आंतरिक हिस्सों में भारतीय सेना कर्तव्यपालन में सदैव तत्पर रहती है। 

 

वेब डेस्क, IBC24


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