उप्र आबकारी विभाग ने ईडी की सूचना पर जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह को गिरफ्तार किया

उप्र आबकारी विभाग ने ईडी की सूचना पर जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह को गिरफ्तार किया

उप्र आबकारी विभाग ने ईडी की सूचना पर जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह को गिरफ्तार किया
Modified Date: January 6, 2026 / 09:39 pm IST
Published Date: January 6, 2026 9:39 pm IST

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग ने मंगलवार को जलवायु कार्यकर्ता हरजीत सिंह को घर में अत्यधिक शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

यह गिरफ्तारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विदेशी मुद्रा उल्लंघन के एक मामले में उनके घर की तलाशी लिए जाने के एक दिन बाद हुई। संबंधित मामले में उन पर विदेश से मिली छह करोड़ रुपये की धनराशि के दुरुपयोग और विदेशी ‘इन्फ्लुएंसर’ समूहों की ओर से विमर्श गढ़े जाने का आरोप है।

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान सिंह की पाकिस्तान और बांग्लादेश की यात्राएं तथा इनका वित्तपोषण भी जांच के दायरे में है।

 ⁠

संघीय एजेंसी ने सोमवार को प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता सिंह और उनकी पत्नी ज्योति अवस्थी के दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित परिसरों के अलावा, उनकी कंपनी सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (एसएसपीएल) की तलाशी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के प्रावधानों के तहत ली थी।

ईडी ने बताया कि सोमवार को उसे गाजियाबाद स्थित उनके आवास पर तलाशी के दौरान भारतीय शराब और आईएमएफएल (भारत निर्मित विदेशी शराब) ‘‘अनुमानित सीमा से अधिक’’ मात्रा में (लगभग 45 लीटर) मिली। इसने प्रेस विज्ञप्ति में ‘सिवास 12’ और ‘ग्लेनमोरंगी’ जैसे ब्रांडों की तस्वीरें भी साझा कीं।

इसने कहा कि यह जानकारी स्थानीय आबकारी अधिकारियों के साथ साझा की गई, जिन्होंने अतिरिक्त शराब जब्त कर ली और सिंह को उत्तर प्रदेश राज्य आबकारी कानूनों के ‘‘उल्लंघन’’ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

सिंह और अवस्थी जैविक खाद्य कंपनी सतत संपदा के सह-संस्थापक हैं। आरोपों पर उनकी प्रतिक्रिया जानने के लिए ‘पीटीआई’ द्वारा भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला।

ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि एसएसपीएल खुद को जैविक खेती को बढ़ावा देने और जैविक उत्पादों के विपणन में लगी एक कृषि-आधारित कंपनी के रूप में ‘‘प्रस्तुत’’ करती है, लेकिन यह केवल एक ‘‘दिखावटी’’ गतिविधि थी।

इसने दावा किया, ‘‘कंपनी की प्राथमिक गतिविधि विदेशी ‘इन्फ्लुएंसर’ समूहों की ओर से भारत में जीवाश्म ईंधन अप्रसार संधि (एफएफ-एनपीटी) के समर्थन में प्रचार करने के लिए विदेशी धन का प्रवाह करने की प्रतीत होती है।’’

एफएफ-एनपीटी एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधन उत्पादन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना है।

इसने कहा कि एसएसपीएल के वित्तीय आंकड़ों से पता चला है कि 2020-21 से पहले यह घाटे में चल रही थी।

एजेंसी के अनुसार, 2021 के बाद, विदेशी प्रेषण के रूप में 6.5 करोड़ रुपये से अधिक की प्राप्ति के साथ, एसएसपीएल ने ‘‘परामर्श सेवाओं’’ और ‘‘कृषि उत्पाद बिक्री’’ से राजस्व के रूप में इन निधियों को दर्ज करके लाभ कमाना शुरू कर दिया। एसएसपीएल के शेयरधारकों-हरजीत सिंह और ज्योति अवस्थी ने विदेशी गैर सरकारी संगठनों से प्राप्त धन को निजी उपयोग के लिए अपने व्यक्तिगत खातों में ‘‘अंतरित’’ कर दिया।

ईडी ने कहा कि एफएफ-एनपीटी को भले ही जलवायु पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा हो, लेकिन इसे अपनाने से भारत को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) जैसे वैश्विक मंचों पर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है और इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।

इसने यह भी आरोप लगाया कि एसएसपीएल को 2021-25 के बीच ‘क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क’ (सीएएन) और स्टैंड.अर्थ आदि सहित विदेशी संस्थाओं से ‘‘परामर्श’’ शुल्क के बहाने छह करोड़ रुपये की रकम प्राप्त हुई, जिन्होंने बदले में रॉकफेलर फिलैंथ्रोपी एडवाइजर्स जैसे गैर सरकारी संगठनों से बड़ी मात्रा में धन प्राप्त किया।

ईडी ने कहा कि हालांकि, दस्तावेजों के सत्यापन से पता चलता है कि वास्तव में यह धन भारत के भीतर एफएफ-एनपीटी के एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए था।

एजेंसी ने कहा कि वह ‘ब्रीद पाकिस्तान समिट’ के लिए फरवरी 2025 में सिंह की पाकिस्तान यात्रा और वहां उनसे मिले विभिन्न व्यक्तियों के बारे में जांच कर रही है।

इसने यह भी कहा कि उन्होंने दिसंबर 2025 में बांग्लादेश की यात्रा भी की थी, जब पड़ोसी देश में ‘‘भारत विरोधी’’ प्रदर्शन हो रहे थे, और बिना किसी आधिकारिक निमंत्रण के शेर-ए-बांग्ला विश्वविद्यालय में व्याख्यान दिया तथा ऐसे विभिन्न व्यक्तियों से मुलाकात की जिनका घोषित उद्देश्य से कोई संबंध नहीं था।

ईडी ने कहा कि इन यात्राओं के लिए मिली धनराशि की भी जांच की जा रही है।

इसने कहा कि एजेंसी फेमा के संदिग्ध उल्लंघन की जांच कर रही है और यह भी पता लगा रही है कि क्या वित्त पोषित गतिविधियां राष्ट्रीय हित, विशेष रूप से भारत की ऊर्जा सुरक्षा के खिलाफ थीं।

संघीय जांच एजेंसी ने कहा, ‘‘वित्तीय लेन-देन, विदेशी वित्तपोषण संस्थाओं की भूमिका और निदेशकों की गतिविधियों की जांच जारी है।’’

भाषा

नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


लेखक के बारे में