वायरल वीडियो में सिनेमाघर में भीड़ को मुसलमानों के बहिष्कार की शपथ लेते हुए दिखाया गया

वायरल वीडियो में सिनेमाघर में भीड़ को मुसलमानों के बहिष्कार की शपथ लेते हुए दिखाया गया

वायरल वीडियो में सिनेमाघर में भीड़ को मुसलमानों के बहिष्कार की शपथ लेते हुए दिखाया गया
Modified Date: March 17, 2026 / 05:31 pm IST
Published Date: March 17, 2026 5:31 pm IST

वसई (महाराष्ट्र), 17 मार्च (भाषा) महाराष्ट्र के पालघर जिले से कथित तौर पर सामने आए एक वीडियो में सिनेमाघर में लोगों को नारे लगाते और मुसलमानों का सामाजिक एवं आर्थिक बहिष्कार करने की शपथ लेते दिखाया गया है, जिसके बाद इसकी तीखी आलोचना हुयी है।

कांग्रेस के एक सांसद ने यह दावा किया कि वायरल वीडियो 10 मार्च को वसई के एक सिनेमा हॉल में शूट किया गया था, इसके बाद मीरा-भायंदर वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस आयुक्तालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि वीडियो की सत्यता की अभी पुष्टि की जानी बाकी है।

अधिकारी ने कहा, ‘हमें यह पुष्टि नहीं कर सकते हैं कि यह वीडियो कहां रिकॉर्ड किया गया है लेकिन हमारा मानना है कि यह कुछ शरारती तत्वों की करतूत हो सकती है।’

सांसद ने दावा किया कि वीडियो में विवादित फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ देखने के बाद लोग मुसलमानों का बहिष्कार करने की शपथ लेते दिख रहे हैं।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन ने यह वीडियो इंटरनेट पर साझा किया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘पालघर जिले के वसई में 10 मार्च को फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ का मुफ्त में प्रदर्शन किया गया जिसके बाद वहां मौजूद लोगों ने कथित तौर पर मुसलमानों के आर्थिक और सामाजिक बहिष्कार का आह्वान करने का सामूहिक रूप से शपथ लिया।’

उन्होंने कहा, ‘भाजपा सरकार के तहत दुष्प्रचार आधारित विमर्श को लगातार प्रोत्साहन मिलने से मुसलमानों को तेजी से निशाना बनाया जा रहा है। जब सिनेमा का इस्तेमाल किसी पूरे समुदाय को कलंकित करने के लिए एक राजनीतिक उपकरण के रूप में किया जाता है तो यह पूर्वाग्रह को संगठित भेदभाव में बदलने और मुस्लिम विरोधी भावनाओं को और अधिक बढ़ावा देने का जोखिम पैदा करता है।’

फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (2023) का अगला भाग इस साल फरवरी में प्रदर्शित किया गया। यह फिल्म राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस का केंद्र बनी हुई है। समर्थकों का दावा है कि फिल्म असहज सच्चाइयों को उजागर करती है, जबकि आलोचकों का तर्क है कि यह अतिशयोक्ति कर विभाजनकारी विचारों को बढ़ावा देती है।

भाषा प्रचेता रंजन

रंजन


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