महाराष्ट्र में बाघ ने तय की 400 किमी से अधिक की दूरी, जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत

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महाराष्ट्र में बाघ ने तय की 400 किमी से अधिक की दूरी, जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 12:09 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 12:09 PM IST

बीड (महाराष्ट्र), एक सितंबर (भाषा) महाराष्ट्र के यवतमाल स्थित टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य का एक युवा बाघ करीब 400 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर अब धाराशिव जिले में पहुंच गया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि हाल में यह बाघ बीड जिले के पहाड़ी इलाके में कैमरे में नजर आया था। पिछले दो वर्षों से यह बाघ स्थायी ठिकाने की तलाश में मध्य महाराष्ट्र के पांच जिलों बीड, लातूर, धाराशिव, सोलापुर और अहिल्यानगर के अलग-अलग इलाकों में घूम रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघ का इतने लंबे इलाके में सुरक्षित रूप से घूमना और नए क्षेत्रों में ठहरना क्षेत्र के बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र, पर्याप्त शिकार और जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत है।

इसे पहली बार 10 दिसंबर 2025 और फिर 27 जुलाई 2026 को बीड जिले के आष्टी के पहाड़ी क्षेत्र में देखा गया था। इसके बाद 13 अगस्त को ब्रह्मगांव में एक मवेशी का शिकार किए जाने की घटना के बाद वन विभाग ने वहां ‘कैमरा ट्रैप’ लगाए। इन कैमरों में 20 अगस्त को बाघ की गतिविधि रिकॉर्ड हुई।

आष्टी रेंज के वन अधिकारी अमोल मुंडे ने सोमवार को बताया कि करीब 10 दिनों तक उसकी कोई गतिविधि नजर नहीं आने के बाद बाघ को एक बार फिर 29 अगस्त को धाराशिव जिले की वाशी तहसील के येसवंडी के पास देखा गया।

अधिकारियों के अनुसार, किसी इलाके में बाघ का लंबे समय तक टिके रहना इस बात का संकेत है कि वहां पर्याप्त शिकार और जल संसाधन मौजूद हैं।

बाघ की यह आवाजाही इस बात का ठोस प्रमाण भी है कि टिपेश्वर से धाराशिव स्थित येडशी-रामलिंग घाट अभयारण्य को जोड़ने वाला प्राकृतिक वन्यजीव गलियारा अब भी सक्रिय और प्रभावी है।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, येडशी क्षेत्र इस बाघ के बड़े आवासीय क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन गया है।

मुंडे ने कहा, ‘‘फिलहाल बाघ भूम और धाराशिव की सीमा के साथ तेरखेडा-येसवंडी इलाके में घूम रहा है और संभवतः नलदुर्ग तथा येडशी की ओर बढ़ रहा है।’’

भाषा गोला मनीषा

मनीषा