तृणमूल ने चुनाव जीतने के लिए मुफ्त सेवाओं से बंगाल को कर्ज के जाल में फंसाया: माकपा नेता भट्टाचार्य
तृणमूल ने चुनाव जीतने के लिए मुफ्त सेवाओं से बंगाल को कर्ज के जाल में फंसाया: माकपा नेता भट्टाचार्य
(अमिताव रॉय)
कोलकाता, 27 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल से मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एकमात्र सांसद विकास रंजन भट्टाचार्य ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने के बजाय मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त सेवाएं बांटकर और त्योहारों के लिए निधि मुहैया कराकर राज्य को ‘‘कर्ज के जाल’’ में फंसा दिया है।
भट्टाचार्य ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में दावा किया कि ‘‘इन मुफ्त सेवाओं के लिए धन बाजार से उधार लिया जा रहा है’’ जिससे पश्चिम बंगाल देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है जिन पर कर्ज का सर्वाधिक बोझ है और इसका बोझ अंततः लोगों को ही चुकाना पड़ेगा।
राज्यसभा सदस्य एवं जाने माने वकील भट्टाचार्य का मानना है कि लोगों को अंतत: यह बात समझ आ जाएगी कि इससे नुकसान किसका हो रहा है।
पश्चिम बंगाल के वित्त वर्ष 2026-27 के अंतरिम बजट के अनुसार, राज्य का बकाया कर्ज 8.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है। संशोधित आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 वित्त वर्ष में बकाया कर्ज 7.62 लाख करोड़ रुपये था।
माकपा ने भट्टाचार्य को दक्षिण-पूर्व कोलकाता की यादवपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है।
तृणमूल सरकार ‘लक्ष्मीर भंडार’ योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर माह 1,500 रुपये और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों से संबंधित महिलाओं को 1,700 रुपये दे रही है। इसके अलावा, ‘बांग्लार युवा-साथी’ योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं तथा इमामों, मुअज्जिनों और पुरोहितों को भी मानदेय दिया जा रहा है।
भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘ये सब लाभ राज्य के बुनियादी आर्थिक ढांचे को नष्ट कर रहे हैं।’’
वामपंथी नेता ने तृणमूल सरकार पर पुरोहितों एवं इमामों को धन देकर तथा विज्ञापनों एवं त्योहारों जैसे गैर-उत्पादक उद्देश्यों पर धन खर्च कर राज्य को ‘‘ऋण जाल में धकेलने’’ का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘ऐसा करना असंवैधानिक हैं।’’
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भाजपा और तृणमूल दोनों ही धर्म आधारित राजनीति कर रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा हिंदू धर्म के पक्ष में मजबूती से खड़ी है। ममता बनर्जी भी हिंदू धर्म की उतनी ही समर्थक हैं लेकिन वह अन्य समुदायों को कुछ रियायतें या लाभ देकर इसे छिपाने की कोशिश करती हैं।’’
वामपंथी नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा बहुत पहले से मनाई जाती रही है और बुनियादी ढांचे से जुड़ी मदद को छोड़ दें, तो आयोजकों ने सरकार से कभी वित्तीय सहायता लेने के बारे में नहीं सोचा।
भट्टाचार्य ने कहा, “लेकिन अब ममता बनर्जी पूजा आयोजकों को सीधे पैसा दे रही हैं। ओडिशा में सत्ता में आने के बाद भाजपा ने भी यही तरीका अपनाया है।’’
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का एजेंडा पश्चिम बंगाल में “चालाकी से लागू” कर रही है।
यह पूछे जाने पर कि वह एजेंडा क्या है, माकपा नेता ने कहा, “धर्म और राजनीति के मिश्रण की ऐसी नीति अपनाना, जिसमें आखिरकार धर्म हावी हो जाए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक कार्यों के हर पहलू में भ्रष्टाचार घुस चुका है।
राज्यसभा सदस्य के रूप में भट्टाचार्य का कार्यकाल पांच अप्रैल को समाप्त होगा।
राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘इस बारे में जितना कम कहा जाए, उतना अच्छा है। यहां कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है।’’
उन्होंने विश्वास जताया कि युवा मतदाता वाम मोर्चा उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे शिक्षित युवा पीढ़ी तृणमूल के झूठे वादों से पूरी तरह निराश नजर आ रही है।’’
भाषा सिम्मी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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