शीर्ष अदालत ने विचाराधीन कैदियों की जमानत की अवधि बढ़ाने का सिलसिला खत्म करने के आदेश पर लगाई रोक

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शीर्ष अदालत ने विचाराधीन कैदियों की जमानत की अवधि बढ़ाने का सिलसिला खत्म करने के आदेश पर लगाई रोक

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  • Publish Date - October 29, 2020 / 01:30 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:31 PM IST

नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी जिसमें उन विचाराधीन कैदियों को दो से 13 नवंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से समर्पण करने का निर्देश दिया गया था जिनकी कोविड-19 लॉकडाउन की वजह से जमानत की अवधि बढ़ा दी गयी थी।

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की पीठ ने उच्च न्यायालय के इस आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली सरकार और अन्य को नोटिस जारी किये। पीठ ने इन सभी से जवाब मांगा है।

उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ नेशनल फोरम फॉर प्रिजन रिफार्म्स ने अपील दायर की है।

इस मामले में अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिकन गन्साल्विज और अधिवक्ता अजय वर्मा पेश हुये।

इस संगठनन ने अपनी अपील में कहा है कि उच्च न्यायालय का यह आदेश उसके 23 मार्च, 2020 के आदेश की भावना के खिलाफ है जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा नियुक्त अपनी ही उच्चाधिकार प्राप्त समिति की आठ सिफारिशों का अवलोकन किये बगैर ही उसे दरकिनार कर दिया है।

अपील में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने उसके समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों को पूरी तरह गलत समझा और इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि 16,000 कैदियों में सिर्फ तीन ही कोरोना वायरस संक्रमित मामले हैं।

दूसरा यह कि ‘जघन्य अपराध’ करने के आरोपों में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई के बारे में उच्चाधिकार प्राप्त समिति ने सावधानीपूर्वक विचार करके कारण भी बताये थे लेकिन इन पर गौर ही नहीं किया गया।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि वे सभी विचाराधीन कैदियों, जिनकी जमानत की अवधि बढ़ाई गयी थी, को दो से 13 नवंबर के बीच चरणबद्ध तरीके से जेल में समर्पण करना होगा।

उच्च न्यायालय ने 24 अगस्त को अपने सभी अंतरिम आदेश 31 अक्टूबर तक के लिये बढ़ा दिये थे।

भाषा अनूप

अनूप उमा

उमा