Chhattisgarh Handloom Fashion Show : नई जिंदगी की नई उड़ान! आत्मसमर्पित महिलाओं ने रैंप पर बिखेरा आत्मविश्वास, तस्वीरें जीत लेंगी आपका दिल

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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में आयोजित फैशन शो में सुकमा के पुनर्वास केंद्र से आई आत्मसमर्पित महिलाओं ने पारंपरिक हथकरघा परिधानों में रैंप वॉक कर बदलाव, आत्मसम्मान और नए जीवन का प्रेरक संदेश दिया।

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  • Publish Date - August 7, 2026 / 10:56 PM IST,
    Updated On - August 7, 2026 / 11:04 PM IST

Chhattisgarh Handloom Fashion Show / Image Source : SOCIAL MEDIA

HIGHLIGHTS
  • आत्मसमर्पित महिलाओं ने रैंप पर पेश की बदलाव की प्रेरक कहानी।
  • पारंपरिक हथकरघा परिधानों के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई पहचान।
  • हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौट रही महिलाओं ने दिया आत्मनिर्भरता का संदेश।

रायपुर : Chhattisgarh Handloom Fashion Show राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक फैशन शो के दौरान एक बेहद प्रेरक और भावुक कर देने वाला दृश्य देखने को मिला। यहाँ राज्य के पारंपरिक हथकरघा परिधानों में सजी-धजी आत्मसमर्पित बेटियों ने रैंप वॉक कर बदलाव, आत्मसम्मान और नए जीवन की एक अनूठी मिसाल पेश की।

पुनर्वास केंद्र से आईं आत्मसमर्पित महिलाओं ने लिया हिस्सा

यह आयोजन केवल एक फैशन शो तक सीमित नहीं था, बल्कि हिंसा का मार्ग छोड़कर विकास, शांति और मुख्यधारा में लौटते नए छत्तीसगढ़ की सशक्त अभिव्यक्ति बना। इस खास वॉक में सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र से आईं आत्मसमर्पित महिलाओं पुनेम देवे, मीडियम गंगी, मड़वी देवे, मड़वी नदन्नी, मड़वी माले, पोड़ियाम राजे, डोड्डी रमे, मड़काम भीमे और पुनेम जोयट्टी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ हिस्सा लिया और अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत का संदेश दिया।

पारंपरिक कला को बढ़ावा मिल रहा

इस अवसर पर राज्य के बुनकर भाई-बहनों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं और उनकी अद्भुत कला, सृजनशीलता और अथक परिश्रम को नमन किया गया। हथकरघा उद्योग के माध्यम से जहाँ एक ओर पारंपरिक कला को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर पुनर्वासित महिलाओं के स्वावलंबन को भी नया बल मिल रहा है।भटके हुए जीवन से निकलकर सम्मानजनक भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही इन बेटियों के जज्बे ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

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