शीर्ष माओवादी नेता देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया

शीर्ष माओवादी नेता देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया

शीर्ष माओवादी नेता देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया
Modified Date: February 22, 2026 / 07:27 pm IST
Published Date: February 22, 2026 7:27 pm IST

हैदराबाद, 22 फरवरी (भाषा) माओवादी संगठन के शीर्ष कमांडर और प्रमुख “रणनीतिकार” तिप्पिरी तिरुपति उर्फ ​​देवजी ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि देवजी तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी है और उसके आत्मसमर्पण को प्रतिबंधित माओवादी संगठन के लिए झटका माना जा रहा है।

माना जाता है कि देवजी (62) ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माओवादी (भाकपा-माओवादी)के दिवंगत महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजु का स्थान लिया था, जिसकी मई 2025 में मृत्यु हो गई थी।

इस बीच, देवजी के एक भाई ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वे अब उनसे मिल पाएंगे।

अधिकारी ने बताया कि एक शीर्ष माओवादी मल्ला राजी रेड्डी और भाकपा(माओवादी) के कई कार्यकर्ताओं ने भी आत्मसमर्पण किया है।

अधिकारी ने बताया कि इन माओवादियों का आत्मसमर्पण केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए निर्धारित मार्च 2026 की समय सीमा से कुछ दिन पहले हुआ है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “कुछ दिनों में आत्मसमर्पण को आधिकारिक तौर पर दर्ज किया जाएगा…वे तेलंगाना पुलिस के साथ हैं।’’

खबरों के अनुसार, देवजी पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। उसने पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का गठन किया था और भाकपा (माओवादी) के प्रमुख केंद्रीय समिति सदस्य और माओवादी पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य बना था।

देवजी, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के माड़ से संचालित केंद्रीय सैन्य आयोग (सीएमसी) के प्रभारी के रूप में कार्यरत है।

सूत्रों के अनुसार, 1982 में जगतियाल जिले के कोरुतला में इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट यूनियन (आरएसयू) की ओर आकर्षित हुआ।

उन्होंने बताया कि इसी दौरान करीमनगर जिले में आरएसयू और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के बीच झड़पें हुईं और देवजी को इस मामले में आरोपी बनाया गया था।

देवजी 1983 में, भाकपा माले (पीडब्ल्यूजी) में शामिल हुआ और भूमिगत हो गया।

सूत्रों के अनुसार, 1983-1984 के दौरान उसने गडचिरोली दलम में दलम सदस्य के रूप में काम किया और 1985 में उसे क्षेत्रीय समिति सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद 2001 में उसे केंद्रीय समिति सदस्य के रूप में पदोन्नत किया गया और 2016 में वह सीएमसी का प्रभारी था।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने 17 फरवरी को छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के साथ नम्बी और कोरगोटालू हिल्स (केजीएच), जिसे कर्रेगुट्टा हिल्स के नाम से भी जाना जाता है, जैसे क्षेत्रों में ‘केजीएच 2’ नामक एक व्यापक अभियान शुरू किया था।

अधिकारियों ने पहले बताया था कि प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के मिसिर बेसरा उर्फ ​​भास्कर, देवजी, राममन्ना उर्फ ​​गणपति उर्फ ​​लक्ष्मण राव और राजी रेड्डी समेत शीर्ष चार केंद्रीय समिति (सीसी) सदस्यों सहित लगभग 300 नक्सली उन अंतिम लोगों में शामिल हैं, जिनकी सुरक्षा बल तलाश कर रहे थे।

अधिकारियों ने कहा कि उन्हें या तो आत्मसमर्पण कर देना चाहिए या मार्च 2026 की समय सीमा को पूरा करने के लिए तेज किए गए अभियानों के दौरान सेना उन्हें खत्म कर देगी।

तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी ने 15 फरवरी को राज्य के लगभग 15 बचे हुए चरमपंथियों सहित सभी भूमिगत भाकपा (माओवादी) पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से हथियार डालने की अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि जो लोग मुख्यधारा में शामिल होने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें राज्य सरकार की ‘‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास योजना’’ के तहत तत्काल सहायता और लाभ प्रदान किए जाएंगे।

रेड्डी ने पहले कहा था कि पिछले दो वर्षों में तेलंगाना पुलिस के निरंतर प्रयासों से विभिन्न स्तरों के 588 माओवादी सामान्य जीवन में लौट आए हैं।

‘पीटीआई-भाषा’ से बात करते हुए देवजी के छोटे भाई गंगाधर ने इस घटनाक्रम पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, “हमें बहुत खुशी है कि हम लंबे समय बाद अपने भाई से मिल पाएंगे।”

उन्होंने याद किया कि देवजी के घर छोड़ने के बाद से परिवार उनसे दशकों से नहीं मिला था।

गंगाधर ने कहा, “माओवादी समूह में शामिल होने के बाद, हम उनसे मिल नहीं पाए। मीडिया में प्रकाशित तस्वीरों के अलावा, हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं रहा।”

उन्होंने आगे बताया कि देवजी का विवाह हो चुका था, लेकिन उसकी पत्नी का बाद में देहांत हो गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके बड़े भाई वेंकटी भी अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि उनकी बहन फिलहाल हैदराबाद में रहती हैं।

भाषा

प्रशांत दिलीप

दिलीप


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