Top Maoist Leader Surrender: टॉप माओवादी निरंजन का टूटा हौसला.. बीवी अंकिता और 17 साथियों के साथ कर दिया सरेंडर, जानें कितना था इनाम

Top Maoist Leader Surrender: छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सल-विरोधी अभियान के दौरान तीन नक्सली कैडर मारे गए हैं। गढ़चिरोली पुलिस द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान के अनुसार, अबूझमाड़ के जंगल से तड़के सुबह एयरलिफ्ट किए गए एक सी-60 जवान ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।

Top Maoist Leader Surrender: टॉप माओवादी निरंजन का टूटा हौसला.. बीवी अंकिता और 17 साथियों के साथ कर दिया सरेंडर, जानें कितना था इनाम

Top Maoist Leader Surrender || Image- IBC24 News File

Modified Date: February 6, 2026 / 07:24 pm IST
Published Date: February 6, 2026 7:24 pm IST
HIGHLIGHTS
  • एक करोड़ के इनामी नक्सली सरेंडर
  • स्टेट कमेटी सदस्य दंपत्ति शामिल
  • माओवादी संगठन को बड़ा झटका

भुवनेश्वर: देश के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित राज्य छत्तीसगढ़ में हर दिन पुलिस और सुरक्षाबलों को माओवादी संगठन के खिलाफ बड़ी सफलताएं मिल रही है। इसी बीच खबर है कि, ओड़िसा प्रदेश में भी पुलिस नक्सलियों के एक बड़े नेटवर्क को तोड़ने में कामयाब रही है। (Top Maoist Leader Surrender) पुलिस के प्रयासों से करीब 17 नक्सलियों ने अपने हथियार डाले है। इस में एक दंपत्ति और 17 अन्य लोग शामिल हैं। जिस दंपत्ति ने सरेंडर किया है उस पर 55.10 लाख रुपये का इनाम था।

पत्र लिखकर जताई थी सरेंडर की इच्छा

इस बारें में राज्य पुलिस के महानिदेशक वाई बी खुराना ने बताया कि यह दंपत्ति माओवादी के राज्य समिति के सदस्य थे। निरंजन राउत उर्फ निखिल, और उनकी पत्नी रश्मिरा लेंका उर्फ इंदु ने अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया। इससे पहले, राउत और उनकी पत्नी ने ओडिशा सरकार को एक पत्र लिखकर सरेंडर करने की इच्छा जताई थी। दोनों राज्य समिति के सदस्य हैं, जो माओवादी संगठन में केंद्रीय समिति के बाद दूसरा सबसे बड़ा पद है।

हथियार और गोला-बारूद भी सौंपे

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वाई बी खुराना ने कहा कि राउत, लेंका और 13 अन्य ने रायगड़ा के पुलिस अधीक्षक के सामने सरेंडर किया, जबकि पार्टी के चार अन्य सदस्यों ने कंधमाल जिले में हिंसा छोड़ दी। (Top Maoist Leader Surrender) सरेंडर करने वाले माओवादियों ने पुलिस को कुछ हथियार और गोला-बारूद भी सौंप दिए। उन्होंने कहा कि अब राज्य में बहुत कम माओवादी बचे हैं।

अबूझमाड़ में 3 नक्सली ढेर, एक जवान शहीद

इसी तरह छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर स्थित अबूझमाड़ के घने जंगलों में नक्सल-विरोधी अभियान के दौरान तीन नक्सली कैडर मारे गए हैं। गढ़चिरोली पुलिस द्वारा शुक्रवार को जारी एक बयान के अनुसार, अबूझमाड़ के जंगल से तड़के सुबह एयरलिफ्ट किए गए एक सी-60 जवान ने भी अस्पताल में दम तोड़ दिया।

सुरक्षा बलों ने आज सुबह दो नक्सलियों के शव बरामद किए , जिससे मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की कुल संख्या तीन हो गई है। अधिकारियों ने घटनास्थल से एक एके-47 राइफल और एक एसएलआर (सेल्फ-लोडिंग राइफल) भी बरामद की है। मारे गए नक्सलियों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।

आज सुबह सुदूर वन क्षेत्र से एयरलिफ्ट करके भामरागड के निकटतम उप जिला अस्पताल ले जाए गए घायल सी60 जवान दीपक चिन्ना मदावी ने दम तोड़ दिया। एक अन्य जवान, जोगा मदावी को गोली लगी थी, (Top Maoist Leader Surrender) लेकिन उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। गढ़चिरोली पुलिस के अनुसार, “अबूझमाड़ के घने जंगल से तड़के सुबह एयरलिफ्ट करके भामरागड के पास के उप जिला अस्पताल में लाए गए घायल सी60 जवान दीपक चिन्ना मदवी ने दम तोड़ दिया। एक अन्य जवान, जोगा मदवी, को गोली लगी थी; वह अब खतरे से बाहर है।”

पूर्वी महाराष्ट्र में स्थित गढ़चिरोली एक घने जंगलों वाला और आदिवासी बहुल जिला है, जो नक्सली गतिविधियों का गढ़ माना जाता है। इस क्षेत्र का दुर्गम भूभाग सुरक्षा अभियानों को चुनौतीपूर्ण बनाता है। सी-60 महाराष्ट्र पुलिस की एक विशेष कमांडो इकाई है, जिसे गढ़चिरोली क्षेत्र में नक्सल-विरोधी अभियानों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है।

अक्टूबर 2025 में भूपति ने किया था सरेंडर

इससे पहले अक्टूबर 2025 में, महाराष्ट्र सरकार के वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक सफलता मिली, जब नक्सली कमांडर मल्लोजुला वेनोगोपाल राव उर्फ ​​भूपति उर्फ ​​सोनू उर्फ ​​अभय ने गढ़चिरोली पुलिस मुख्यालय में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। (Top Maoist Leader Surrender) भूपति के साथ लगभग 60 नक्सलियों ने भी अपने हथियार डाले, जो राज्य के इतिहास में सबसे बड़े आत्मसमर्पणों में से एक था। भूपति ने उस समय यह शर्त रखी थी कि वह केवल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ही आत्मसमर्पण करेगा।

भूपति का जन्म तेलंगाना के पेद्दापल्ली जिले में हुआ था। वाणिज्य में स्नातकोत्तर और ब्राह्मण परिवार से संबंध रखने वाले भूपति माओवादी आंदोलन के सबसे शिक्षित व्यक्तियों में से एक माने जाते थे। उनके बड़े भाई किशनजी एक वरिष्ठ माओवादी नेता थे, जिन्हें 2012 में बंगाल में एक मुठभेड़ में मारे जाने से पहले सीपीआई (माओवादी) का महासचिव बनने की प्रबल संभावना थी।

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