बंगाल में न्यायाधिकरणों ने शुरू की सुनवाई, सूची में नाम जुड़वाने के लिये मतदाता कतारों में
बंगाल में न्यायाधिकरणों ने शुरू की सुनवाई, सूची में नाम जुड़वाने के लिये मतदाता कतारों में
कोलकाता, छह अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में सोमवार सुबह से ही ऐसे हजारों लोग, जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे, न्यायिक अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखने के लिए कतारों में खड़े नजर आए। राज्य में एसआईआर के बाद ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की अपीलों के निपटारे के लिए न्यायाधिकरणों ने सुनवाई शुरू कर दी है।
पहले चरण में मतदान वाले 152 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं के संबंध में निर्णय के लिए सोमवार अंतिम दिन है। ऐसे मतदाताओं के लिए, समीक्षा प्रक्रिया के दौरान उनकी प्रारंभिक अपीलें खारिज होने के बाद न्यायाधिकरण ही अंतिम उपाय है।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि मतदाता सूची को आधी रात तक “अंतिम रूप” दिया जाएगा, लेकिन जो लोग सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे वे 22 अप्रैल तक न्यायाधिकरणों से संपर्क कर सकते हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची से जिनके नाम हटा दिए गए थे, उन लगभग 23 लाख लोगों के बारे में फैसला न्यायाधिकरणों द्वारा किया जाएगा।
पूर्वी बर्धमान के कटवा में, मोहम्मद मुस्तफा ने कहा कि वह सुबह चार बजे से बीडीओ कार्यालय के बाहर इंतजार कर रहे हैं और देर शाम तक वहीं रहने की तैयारी करके आए हैं।
उन्होंने कहा, “मेरे बड़े भाई, चाचा और मेरा नाम ‘विचाराधीन’ के रूप में दर्ज है, जबकि हमने पिछली एसआईआर सुनवाई में सभी दस्तावेज – डिजिटल राशन कार्ड, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, बिजली बिल और निवास प्रमाण – जमा कर दिए थे।”
सिख समुदाय के सदस्य महिंदर सिंह ने कहा कि उनके तीन भाइयों में से किसी का भी नाम सूची में नहीं था।
उन्होंने दावा किया, “पासपोर्ट समेत सभी आवश्यक दस्तावेज देने के बावजूद हमारे दोनों बेटों के नाम भी दर्ज नहीं हैं। हम देर रात दो बजे से इंतजार कर रहे हैं और जब तक हमें संतुष्टि नहीं मिल जाती, तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे। निर्वाचन आयोग हमारे नागरिकता अधिकारों के साथ खिलवाड़ कैसे कर सकता है? हम पश्चिम बंगाल में 80 वर्षों से अधिक समय से रह रहे हैं।”
सुदूर उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में, बिपाशा बैद्य अपने बच्चे के साथ जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय के सामने खड़ी थीं।
बैद्य ने दावा किया, “मैंने अपने दस्तावेज चार बार जमा किए थे, और आखिरी दो बार मतदान अधिकारी ने मुझे बताया कि सब ठीक है और मेरा नाम सूची में शामिल कर लिया जाएगा। हालांकि, मुझे अभी तक किसी भी पूरक सूची में अपना नाम नहीं मिला है।”
दक्षिण 24 परगना के कैनिंग से भी इसी तरह के दृश्य देखने को मिले, जहां बीडीओ कार्यालय परिसर के बाहर लंबी कतारें लगी हुई थीं।
न्यायाधिकरण भवनों के आसपास पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय बलों के कर्मियों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया था, जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों ने न्यायिक अधिकारियों के साथ संवाद करने में लोगों की सहायता के लिए पास में ही शिविर लगा रखे थे।
भाषा प्रशांत अविनाश
अविनाश

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