तृणमूल संकट गहराया : बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की

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तृणमूल संकट गहराया : बागी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की

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  • Publish Date - June 14, 2026 / 07:08 PM IST,
    Updated On - June 14, 2026 / 07:08 PM IST

नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस में संकट रविवार को और गहरा गया, जब ममता बनर्जी के करीबी सुदीप बंद्योपाध्याय ने बागी गुट का समर्थन किया, और बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से ‘‘मूल तृणमूल कांग्रेस’’ संसदीय दल के तौर पर मान्यता मांगने से पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की।

बंद्योपाध्याय ने कहा कि बागी सांसदों और विधायकों की अपील के बाद उन्होंने बागी खेमे के साथ बने रहने का फैसला किया। हालांकि, बंद्योपाध्याय ने यह भी कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे जाने वाले पत्र पर उन्होंने अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वे ऐसा केवल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में ही करेंगे।

बागी सांसदों के रविवार शाम को शुभेंदु अधिकारी से मिलने की भी संभावना है।

सोमवार को बिरला के साथ होने वाली बैठक से पहले अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए सांसदों ने दिल्ली में यादव से मुलाकात की।

इस घटनाक्रम से एक दिन पहले ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माने जाने वाले तृणमूल के वरिष्ठ नेता एवं सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह और भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद बागी खेमे का दामन थाम लिया।

बंद्योपाध्याय ने रविवार को पत्रकारों से कहा, ‘‘मेरी अमित शाह के साथ बैठक हुई थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ज्यादातर सांसद और विधायक चाहते थे कि यह पहल सफल हो। वे चाहते थे कि पार्टी ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में आगे बढ़े और वह मुख्य सलाहकार और पार्टी नेता जैसी भूमिका निभाएं। उनकी अपील ने सचमुच मेरे दिल को छू लिया। इसलिए, मैंने तय किया कि मैं उनके (बागी खेमे के) साथ बना रह सकता हूं।’’

बंद्योपाध्याय ने कहा कि उन्होंने बिरला को सौंपे जाने वाले पत्र पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं केवल शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी में ही हस्ताक्षर करूंगा।’’

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष के साथ ‘‘मूल तृणमूल’’ पर अपना दावा पेश करने के लिए होने वाली बैठक से पहले, रविवार को सांसद सायोनी घोष और माला रॉय दिल्ली पहुंचीं।

दिल्ली हवाईअड्डे पर रॉय और घोष, दोनों ने ही मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया।

घोष ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को जवाब दूंगी, आपको नहीं।’’

तृणमूल कांग्रेस के बागी खेमे की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने रविवार को दावा किया कि दो और सांसद बागी खेमे में शामिल होने वाले हैं, जिससे लोकसभा में इस गुट में सदस्यों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी।

दस्तीदार ने नयी दिल्ली रवाना होने से पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेंगे और उनसे अलग गुट के रूप में मान्यता देने की गुजारिश करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हम मुलाकात के लिए दिल्ली जा रहे हैं। हमारे साथ 22 सांसद हैं। अध्यक्ष ने हमें समय दिया है। हम सोमवार को उनसे मिलेंगे और अलग गुट के रूप में मान्यता देने की गुजारिश करेंगे।’’

हालांकि दस्तीदार ने उन दो अतिरिक्त सांसदों की पहचान उजागर नहीं की और कहा कि उनके नाम औपचारिक रूप से गुट में शामिल होने के बाद सामने लाए जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘ जो लोग पिछले चार-पांच वर्षों में पश्चिम बंगाल में मौजूदा स्थिति के खिलाफ ईमानदारी से अपनी राय व्यक्त कर रहे थे, वे हमारे संपर्क में हैं। अब हमारी संख्या 22 हो गई है।’’

बढ़ती उथल-पुथल के बीच, तृणमूल ने संगठन में फिर से फेरबदल किया और घोष, रॉय तथा बंद्योपाध्याय को पार्टी के अहम पदों से हटा दिया।

अर्नब बनर्जी को घोष की जगह तृणमूल युवा कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया, जबकि कालीगंज की विधायक अलीफा अहमद ने रॉय की जगह पार्टी की महिला शाखा की अध्यक्ष का पद संभाला। एक और अहम बदलाव में, तृणमूल नेता कुणाल घोष को बंदोपाध्याय की जगह पार्टी के उत्तरी कोलकाता संगठनात्मक जिले का अध्यक्ष बनाया गया।

सायोनी घोष और माला रॉय बागी गुट के साथ हैं, इस गुट का दावा है कि उसे तृणमूल के 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 का समर्थन हासिल है।

हालांकि, तृणमूल ने बागी नेताओं के प्रयासों को खारिज कर दिया और कहा कि दलबदल-रोधी कानून संसद के भीतर एक अलग गुट बनाने की इजाजत नहीं देता है।

तृणमूल की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने रविवार को कहा कि अलग गुट बनाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सांसदों को अयोग्य ठहराया जा सकता है, जब तक कि उनकी मूल राजनीतिक पार्टी दसवीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत किसी दूसरी पार्टी में विलय न कर ले।

भाषा शफीक प्रशांत

प्रशांत