तुर्कमान गेट हिंसा: अदालत ने प्रमुख आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

तुर्कमान गेट हिंसा: अदालत ने प्रमुख आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

तुर्कमान गेट हिंसा: अदालत ने प्रमुख आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
Modified Date: April 6, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: April 6, 2026 7:46 pm IST

नयी दिल्ली, छह अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने जनवरी में तुर्कमान गेट में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान हुई पथराव की घटना के सिलसिले में एक प्रमुख आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिल्पी जैन ने साजिद इकबाल की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उस पर घटना वाली रात भीड़ को भड़काने का आरोप है।

इससे पहले 21 जनवरी को एक अलग सत्र अदालत ने इकबाल की पहली अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच बहुत प्रारंभिक चरण में है और अपराध ‘‘गंभीर प्रकृति’’ का है।

न्यायाधीश ने छह अप्रैल के आदेश में कहा, ‘‘अपराध की गंभीरता, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की गंभीरता, जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं करने के आरोपी के आचरण और कथित अपराध के पीछे की मंशा का पता लगाने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता को देखते हुए… यह अदालत आरोपी साजिद इकबाल को इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने के पक्ष में नहीं है।’’

अदालत ने जांच अधिकारी (आईओ) और अभियोजन पक्ष की ओर से किए गए खुलासों पर भरोसा किया। अदालत ने कहा कि जांच में शामिल होने के बावजूद आरोपी इकबाल ने जांच एजेंसी के साथ सहयोग नहीं किया।

अदालत ने कहा कि भीड़ का बेहद आक्रामक तरीके से नेतृत्व करने के पीछे उसकी मंशा जानने के लिए उससे हिरासत में पूछताछ की जरूरत है।

उसने कहा कि एजेंसियों के कानूनी कामकाज को रोकने के आरोपी के इरादे की अभी जांच होनी बाकी है और जांच दल को उसके साथ शामिल अन्य लोगों की पहचान का अभी पता लगाना है।

अदालती कार्यवाही के दौरान वीडियो साक्ष्य पेश किए गए, जिनमें इकबाल को मस्जिद की ओर जाते, पुलिस का अवरोधक हटाते और हाथ के इशारों से अवरोधक के उस पार भीड़ जुटाते हुए देखा गया।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 221 (लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना), 132 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग), 121 (लोक सेवक को स्वेच्छा से चोट या गंभीर चोट पहुंचाना), 190 (गैरकानूनी रूप के एकत्र के लिए परोक्ष जिम्मेदारी), 191(2)(3) (दंगा), 223(4) (लोक सेवक द्वारा विधिवत घोषित आदेश की अवज्ञा), 109(1) (हत्या का प्रयास), 238 (अपराधी को बचाने के लिए साक्ष्य का जानबूझकर नष्ट किया जाना या झूठी सूचना देना), 49 (अपराध के लिए उकसाना) और 3(5) (समान आशय) तथा लोक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 3 (सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर शरारत करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अब तक इस मामले में 20 आरोपियों को नियमित जमानत दी जा चुकी है।

यह मामला छह और सात जनवरी की मध्यरात्रि को रामलीला मैदान इलाके में मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और अधिकारियों के साथ हुई झड़प से जुड़ा है। इस मामले में 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को ढहाया जा रहा है, जिसके बाद लोग मौके पर जुट गए।

उसने कहा कि करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और दिल्ली नगर निगम के कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं, जिससे क्षेत्र के थाना प्रभारी समेत छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।

भाषा

सिम्मी दिलीप

दिलीप


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