चेन्नई, सात मार्च (भाषा) तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय से तलाक के लिए अर्जी दायर कर चुकी उनकी पत्नी संगीता ने अदालत में एक नया हलफनामा दाखिल कर अंतरिम आदेश की मांग की है कि उन्हें मूल याचिका के निपटारे या अभिनेता-राजनेता द्वारा वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए जाने तक यहां उनके ससुराल में रहने की अनुमति दी जा सके।
संगीता ने अपने हलफनामे में कहा कि उन्होंने प्रतिवादी विजय के खिलाफ विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत एक मूल याचिका दायर की है, जिसमें 25 अगस्त 1999 को चेन्नई में उनके साथ संपन्न हुए विवाह को निरस्त करने की मांग की गई है। उन्होंने विजय से उचित और स्थायी गुजारा भत्ता की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि मूल याचिका दायर करने से पहले उन्होंने आपसी सहमति से गरिमापूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से विवाह विच्छेद सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश की। हालांकि, उनके ये प्रयास सफल नहीं हुए और सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं निकल सका।
उन्होंने कहा, ‘‘इसके विपरीत, इन परिस्थितियों में प्रतिवादी ने अपने वकील के माध्यम से यह स्पष्ट कर दिया कि यदि याचिकाकर्ता तलाक की मांग करते हुए अदालत में जाने का विकल्प चुनती है, तो उसे सुसराल में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
हालांकि, संगीता ने कहा कि उनके पास (इस) परिवार की स्थिति के अनुरूप कोई अन्य आवास नहीं है और वह एक ब्रिटिश नागरिक हैं।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्हें तलाक लेने के लिए विवश होना पड़ा है, क्योंकि उन्होंने अपनी मूल याचिका में पहले ही इसके कारण बता दिए थे।
उस याचिका में उन्होंने कहा था कि विजय के साथ उनका विवाह “पूरी तरह से टूट चुका है”। उन्होंने बताया कि यह सब उनके पति के एक अभिनेत्री के साथ विवाहेतर संबंध के कारण हुआ था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि विजय ने उन्हें “लगातार मानसिक क्रूरता, उपेक्षा और परित्याग” का शिकार बनाया था।
उन्होंने कहा था कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह अभिनेत्री को दूसरे प्रतिवादी के रूप में शामिल कर लेंगी।
इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने अदालत से एक अंतरिम आदेश पारित करने का अनुरोध किया, जिसमें उन्हें “निवास का अधिकार” प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें मूल याचिका के निपटारे तक या प्रतिवादी विजय द्वारा उनकी हैसियत के अनुरूप वैकल्पिक आवास प्रदान किए जाने तक अपने वर्तमान वैवाहिक घर में रहना जारी रखने की अनुमति मिल सके।
मूल याचिका के निपटारे तक, उन्हें उनके ससुराल में उपलब्ध सभी अधिकार, सुख-सुविधाएं और साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए, और इस प्रकार उन्हें न्याय मिलना चाहिए।
उनकी याचिका पर सुनवाई अगले महीने हो सकती है।
भाषा प्रशांत सुरेश
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