नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने लोगों के साथ साढ़े तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों की पहचान आगरा निवासी राम अवतार सिंह और ठगी के मुख्य षड्यंत्रकर्ता विक्रांत सोनी के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, शाहदरा के साइबर थाने में एक व्यक्ति की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था, जिसने आरोप लगाया था कि उसकी जानकारी के बिना उसके बैंक खाते से धोखाधड़ी से 6.65 लाख रुपये निकाल लिए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि धोखाधड़ी पिछले साल 27 से 30 अक्टूबर के बीच हुई थी, और उसे संदेह था कि उसके मोबाइल फोन में एक अज्ञात एपीके फाइल डालकर उसका फोन हैक कर लिया गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘जांच के दौरान, पुलिस ने बैंक लेनदेन रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और तकनीकी निगरानी की, जिससे उन्हें उस खाते का पता चला जिसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के धन को स्थानांतरित करने के लिए किया गया था।’
उन्होंने बताया कि आगरा में छापेमारी की गई, जहां राम अवतार सिंह को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में विक्रांत सोनी की संलिप्तता का पता चला, जिसके बाद एक और छापेमारी की गई और सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया।
जांच से पता चला कि सोनी के संबंध एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से हैं। आरोप है कि 2023 में उसे विदेश में नौकरी का लालच दिया गया और बाद में एक सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से उसका संपर्क एक चीनी नागरिक से हुआ।
इसके बाद उसे थाईलैंड के रास्ते कंबोडिया ले जाया गया, जहां उसे साइबर धोखाधड़ी की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें भारतीय पीड़ितों को निशाना बनाना और एपीके लिंक का उपयोग करना शामिल था।
अधिकारी ने कहा, ‘भारत लौटने के बाद, उसने अपना खुद का नेटवर्क स्थापित किया और सोशल मीडिया के माध्यम से सहयोगियों और विदेशी लोगों के साथ संपर्क में रहा।’
इस गिरोह ने धोखाधड़ी के धन को प्राप्त करने और स्थानांतरित करने के लिए म्यूल (कमीशन पर हासिल) बैंक खातों का इस्तेमाल किया और संदेह है कि उन्होंने पीड़ितों से लगभग 3.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
इस बीच एक अन्य मामले में पुलिस ने फर्जी ऋण ऐप के माध्यम से लोगों के साथ ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह के छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया ‘इस गिरोह ने फर्जी कर्ज ऐप के जरिए पीड़ितों को फंसाया और उनके मोबाइल डेटा तक पहुंच हासिल की। इसके बाद पीड़ितों की छेड़छाड़ वाली तस्वीरों का इस्तेमाल करके उनका उत्पीड़न किया और धमकाया गया और उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर बताई गई रकम चुकाने के लिए मजबूर किया गया।’
भाषा नोमान नोमान माधव
माधव