नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने सदर बाजार इलाके में वर्ष 2014 में एक घर के अंदर हुई गोलीबारी के मामले में दो आरोपियों को हत्या के प्रयास और रात में जबरन घर में घुसने के अपराध का दोषी करार दिया।
अदालत ने कहा कि प्रमुख गवाहों के पलट जाने के बावजूद अभियोजन पक्ष ने मामले को साबित कर दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अंकुर जैन ने सईद बिलाल और शहजादा इरफान को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 458 (रात में जबरन घर में घुसना), धारा 34 (साझा मंशा) के तहत दोषी ठहराया। इसके अलावा बिलाल को बिना लाइसेंस वाला हथियार इस्तेमाल करने के लिए शस्त्र अधिनियम की धारा 27 के तहत भी दोषी ठहराया गया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 20 अप्रैल 2014 को देर रात करीब दो बजे बिलाल, नसरीन और इरफान ने कसाबपुरा में स्थित मोहम्मद वसी के घर में जबरन घुसकर वसी, इमरान और आबिदा पर हमला किया।
बिलाल ने वसी पर गोली चलाई, लेकिन वसी के झुक जाने के कारण गोली दीवार में जा लगी। वहीं इरफान ने वसी के भाई इमरान पर छुरे से हमला करने की कोशिश की, लेकिन वह बच गया।
घर के सभी लोग बाहर निकल आए और शोर मचाया, जिसके बाद आरोपी घटनास्थल से फरार हो गए। बाद में घटनास्थल से एक खाली कारतूस और दीवार पर गोली का निशान मिला।
वसी, इमरान और आबिदा इस मामले के मुख्य प्रत्यक्षदर्शी भी थे। वे गवाही के दौरान पलट गए और अभियोजन पक्ष का समर्थन करने से इनकार कर दिया। अदालत को बताया गया कि गवाही के बीच इन गवाहों ने उच्च न्यायालय में मामला रद्द करने की याचिका भी दायर की थी।
अदालत ने 17 जनवरी के फैसले में कहा, “रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि मुख्य गवाही के बाद मामला समझौते के जरिए निपटाया गया और इसी कारण मामला दर्ज करने की याचिका दाखिल की गई। यह स्पष्ट नहीं है कि वह याचिका वापस ली गई या सूचीबद्ध ही नहीं हुई। इसके बाद अगली तारीख पर गवाह बयानों से पलट गए। अदालतों को इस तरह गुमराह नहीं किया जा सकता।”
अदालत ने वसी की प्रारंभिक गवाही, बरामद गोली, घटनास्थल की तस्वीरों और अन्य सबूतों पर गौर किया।
अदालत ने कहा, “कानून यह नहीं कहता कि दोष सिद्ध करने के लिए चोट लगना अनिवार्य है। इस मामले में आरोपी सईद ने हत्या के इरादे से गोली चलाई और इरफान छुरा लेकर आया था। वसी और उसके भाई के झुक जाने से गोली दीवार में लगी और किसी को चोट नहीं आई। खाली कारतूस और दीवार पर गोली का निशान मिला।”
अदालत ने कहा कि इन तथ्यों से स्पष्ट है कि दोनों आरोपियों का इरादा हत्या का था और इसलिए आईपीसी की धारा 307 के तहत अपराध सिद्ध होता है।
मामले में सजा पर अलग से बहस के लिए 29 जनवरी की तारीख तय की गई है।
भाषा जोहेब मनीषा
मनीषा