एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधन पर यूडीएफ और एलडीएफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया: भाजपा
एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधन पर यूडीएफ और एलडीएफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किया: भाजपा
तिरुवनंतपुरम, दो जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बृहस्पतिवार को सत्तारूढ़ संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) पर विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों का विरोध करने वाले प्रस्ताव का समर्थन कर राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया।
केरल विधानसभा ने बुधवार को केंद्र सरकार से एफसीआरए में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने यह प्रस्ताव पेश करते हुए दावा किया था कि इन संशोधनों से स्वैच्छिक संगठनों पर असर पड़ेगा।
चंद्रशेखर ने ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में कहा कि केरल विधानसभा ने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में प्रस्तावित संशोधनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है, जिनका उद्देश्य विदेशों से मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भारत की सुरक्षा को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन आश्चर्यजनक नहीं। उस विधानसभा से कोई क्या उम्मीद कर सकता है, जिसने पहले अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी अब्दुल नासिर मदनी के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था?”
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव अभियान के दौरान प्रस्तावित संशोधनों को लेकर गलत जानकारी और भय फैलाया था व अब वह देश की सुरक्षा से समझौता करते हुए उसी अभियान को जारी रखे हुए है।
चंद्रशेखर ने कहा कि प्रस्तावित कानून किसी विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना नहीं बनाता और एफसीआरए के तहत हिंदू, ईसाई और मुस्लिम संगठन सभी विदेशी अंशदान प्राप्त करते हैं।
उन्होंने कहा, “इस कानून का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी धन का इस्तेमाल धन शोधन, अवैध गतिविधियों या देश की सुरक्षा को कमजोर करने के लिए न किया जाए।”
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित संशोधन विदेशी स्रोतों से कथित रूप से वित्तपोषित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से केरल की रक्षा करेंगे।
चंद्रशेखर ने कहा, “फिर भी यूडीएफ और एलडीएफ दोनों इसका विरोध कर रहे हैं। उनके लिए सत्ता सर्वोपरि है। हमारे लिए भारत सबसे पहले है।”
भाषा जितेंद्र पवनेश
पवनेश

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