पहाड़ी ज़िलों में गांवों की संख्या में असमान वृद्धि चौंकाने वाली है: पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह

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पहाड़ी ज़िलों में गांवों की संख्या में असमान वृद्धि चौंकाने वाली है: पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह

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  • Publish Date - June 4, 2026 / 12:14 PM IST,
    Updated On - June 4, 2026 / 12:14 PM IST

इंफाल, चार जून (भाषा) मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा है कि उखरुल और सेनापति जिलों की तुलना में कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में गांवों की संख्या में हुई बढ़ोतरी में जो असमानता है, उसे ”नजरअंदाज करना बहुत मुश्किल है।”

उन्होंने कहा कि कांगपोकपी और चुराचांदपुर कुकी-जो बहुल जिले हैं, जबकि उखरुल और सेनापति नगा बहुल जिले हैं।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि वर्ष 1972 में राज्य का दर्जा मिलने के समय कांगपोकपी में 193 गांव थे, जबकि उखरुल में 93 गांव थे। वर्ष 2023 तक कांगपोकपी में गांवों की संख्या बढ़कर 713 हो गई। इसके विपरीत, इन्हीं 51 वर्षों की अवधि के दौरान उखरुल में गांवों की संख्या 93 से बढ़कर केवल 112 हुई।

सिंह ने चुराचांदपुर ज़िले को लेकर कहा कि 1972 में यहां 339 गांव थे, जिनकी संख्या 2023 में बढ़कर 535 हो गई है, जबकि इसी दौरान सेनापति में गांवों की संख्या 129 से बढ़कर केवल 166 हुई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यह असमानता इतनी ज़्यादा है कि इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।’

सिंह मणिपुर के पहाड़ी ज़िलों में म्यांमा से आने वाले अवैध प्रवासियों की आमद के बारे में बहुत मुखर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गांवों की संख्या में बढ़ोतरी का मकसद ‘किसी समुदाय को निशाना बनाना या उन पर दोष मढ़ना नहीं है।’

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मकसद जनसांख्यिकीय बदलावों और मणिपुर तथा देश के दीर्घकालिक हितों पर उनके प्रभावों को समझना है।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि किन कारणों से ‘कांगपोकपी और चुराचांदपुर में नयी बस्तियों का इतनी तेज़ी से विस्तार हुआ, जबकि इसी 51-वर्षीय अवधि के दौरान उखरुल और सेनापति जैसे ज़िले अपेक्षाकृत स्थिर बने रहे?’

भाषा प्रचेता वैभव

वैभव