यूएनएचआरसी ने भारत में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ कथित भेदभाव, हिंसा पर चिंता व्यक्त की

यूएनएचआरसी ने भारत में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ कथित भेदभाव, हिंसा पर चिंता व्यक्त की

यूएनएचआरसी ने भारत में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ कथित भेदभाव, हिंसा पर चिंता व्यक्त की
Modified Date: July 25, 2024 / 10:30 pm IST
Published Date: July 25, 2024 10:30 pm IST

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र/जिनेवा, 25 जुलाई (भाषा) संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति (यूएनएचआरसी) ने भारत में अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ कथित भेदभाव और हिंसा के साथ-साथ देश के कुछ जिलों में दशकों से आतंकवाद रोधी कानून के लागू होने पर बृहस्पतिवार को चिंता व्यक्त की।

जिनेवा स्थित यूएनएचआरसी ने अपने नवीनतम सत्र में सात देशों क्रोएशिया, होंडुरास, भारत, मालदीव, माल्टा, सूरीनाम और सीरिया के मामलों पर गौर करने के बाद अपने निष्कर्ष जारी किए।

 ⁠

निष्कर्षों में नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय संधि के कार्यान्वयन पर समिति की मुख्य चिंताएं और सिफारिशें की गई हैं।

भारत के संबंध में, भेदभाव को दूर करने के लिए उसके द्वारा अपनाए गए उपायों की सराहना करते हुए यूएनएचआरसी ने धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे मुस्लिम, ईसाई और सिख, “अनुसूचित जाति” और “अनुसूचित जनजाति” तथा एलजीबीटीआई लोगों सहित अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ कथित भेदभाव और हिंसा के बारे में चिंता व्यक्त की।

यूएनएचआरसी ने भारत से भेदभाव को प्रतिबंधित करने के लिए व्यापक कानून अपनाने, आम जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने और विविधता के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने के लिए नौकरशाहों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अधिकारियों, न्यायपालिका और सामुदायिक नेताओं को प्रशिक्षण प्रदान करने का आह्वान किया।

भारत ने बार-बार कहा है कि उसका संविधान अपने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर किसी भी चिंता का कोई आधार नहीं है।

यूएनएचआरसी ने इस बात पर चिंता जताई कि सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (आफ्स्पा) और आतंकवाद रोधी कानून के कुछ प्रावधान संधि के अनुरूप नहीं हैं।

यूएनएचआरसी ने कहा, ‘‘समिति ने मणिपुर, जम्मू-कश्मीर और असम जैसे ‘‘अशांत क्षेत्रों’’ में दशकों से आतंकवाद-रोधी कानून के लागू होने पर भी अपनी चिंता व्यक्त की, जिसके कारण मानवाधिकार का व्यापक और गंभीर उल्लंघन हुआ है।’’

इसने भारत से आग्रह किया कि वह संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करे तथा यह सुनिश्चित करे कि अशांत क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी एवं अन्य सुरक्षा उपाय अस्थायी, अत्यंत जरूरी होने पर लागू हों तथा न्यायिक समीक्षा के अधीन हों।

यूएनएचआरसी ने भारत से अशांत क्षेत्रों में मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में जिम्मेदारी स्वीकार करने और सच्चाई का पता लगाने के लिए एक प्रक्रिया शुरू करने को लेकर एक तंत्र स्थापित करने को भी कहा।

भाषा आशीष नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में