उप्र : सभी तलाशी और जब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का निर्देश
उप्र : सभी तलाशी और जब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का निर्देश
प्रयागराज, छह जनवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सभी तलाशी और जब्ती की अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग करने और जब्ती की सूचियां ई-साक्ष्य पोर्टल पर डालने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश सोमवार को न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने शादाब नाम के एक व्यक्ति की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अदालत ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। वह कथित तौर पर 40 मोटरसाइकिलों की बरामदगी के संबंध में चोरी के एक मामले में आरोपी है।
अदालत ने पाया कि पुलिस, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 105 और यूपी बीएनएसएस नियमावली, 2024 के नियम 18 के तहत अनिवार्य तलाशी एवं जब्ती प्रक्रिया को रिकॉर्ड करने में विफल रही थी।
अदालत ने कहा कि इस कानूनी आवश्यकता का पालन करने में विफलता अभियोजन मामलों को कमजोर करती है और इससे दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
न्यायमूर्ति देशवाल ने कहा कि ई-साक्ष्य ऐप या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साधनों से ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का प्रावधान खासतौर पर निर्दोष लोगों को गलत फंसाए जाने से बचाने और मुकदमे के लिए ठोस साक्ष्य तैयार करने के लिए उद्देश्य से किया गया था।
अदालत ने कहा कि इसका अनुपालन नहीं करना “संपूर्ण अभियोजन की कहानी को लेकर संदेह पैदा करता है” और यह “ना केवल लापरवाही, बल्कि पुलिस की तरफ से मनमानी” दर्शाता है।
अदालत ने कहा कि यद्यपि डीजीपी ने 21 जुलाई, 2025 को ऐसी रिकॉर्डिंग की अनिवार्य प्रकृति के संबंध में एक सर्कुलर जारी किया था, कानून के तहत आवश्यक एक विस्तृत एसओपी अब भी लंबित है। अदालत ने डीजीपी को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के समन्वय में यह एसओपी जारी करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा, डीजीपी को ये निर्देश जारी करने होंगे कि बीएनएसएस की धारा 105 के अनुपालन में विफलता से अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सकती है। अदालत ने कहा कि निर्दोष लोगों की रक्षा करने और न्यायिक जांच में साक्ष्य खरे उतरें, यह सुनिश्चित करने के लिए इस धारा को सख्ती से लागू करना आवश्यक है।
भाषा
सं, राजेंद्र रवि कांत

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