बेंगलुरु, 14 जून (भाषा) अमेरिका स्थित एक ईसाई संगठन और छह अन्य लोगों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्ड के नेटवर्क के माध्यम से विदेशी धन का अवैध उपयोग किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सहायक निदेशक सुनील कुमार सिन्हमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर बेंगलुरु के कोथनूर पुलिस थाने में 11 जून को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
प्राथमिकी में जोनाथन एस. राजन, माइका मार्क, अजीत वर्गीस माथाई, वर्गीस चाको, बबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय, अमेरिका स्थित संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (टीटीआई) और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।
शिकायत में ईडी ने आरोप लगाया कि आयकर अधिनियम और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत 18 और 19 अप्रैल को ली गई तलाशी के दौरान यह सामने आया कि आरोपियों ने टीटीआई के साथ मिलकर अमेरिकी बैंक द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्ड्स का उपयोग करके भारत भर में विदेशी धन निकाला और उसका इस्तेमाल किया।
एजेंसी का आरोप है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच छह महीनों में लगभग 92.55 करोड़ रुपये का अवैध उपयोग किया गया, जो फेमा और एफसीआरए के प्रावधानों का उल्लंघन है।
प्राथमिकी के अनुसार, माइका मार्क को 18 अप्रैल को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था और उसके पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद किए गए थे।
इसमें आरोप लगाया गया है कि देशभर में ऐसे 1,000 से अधिक कार्ड वितरित किए गए थे।
ईडी ने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में संदिग्ध नकद निकासी का पता चला है। प्राथमिकी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में धमतरी और बस्तर सहित विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 6.34 करोड़ रुपये निकाले जाने का अनुमान है।
शिकायत में कहा गया है कि विदेशी डेबिट कार्ड्स के जरिए बड़े पैमाने पर नकद निकासी से एक संगठित नेटवर्क की संलिप्तता का संकेत मिलता है और आरोप है कि यह धन नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया गया। शिकायत में कहा गया है कि ऐसी गतिविधियां यूएपीए के तहत गैरकानूनी गतिविधियों की श्रेणी में आती हैं और भारत की सुरक्षा तथा आर्थिक अखंडता के लिए खतरा पैदा करती हैं।
हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए ये आरोप शिकायतकर्ता एजेंसी के दावे हैं और इनकी जांच अभी होना बाकी है।
भाषा गोला अमित
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