Reported By: Vijay Kumar Verma
,Third Child policy for Govt Employees: तीसरा बच्चा सरकारी कर्मचारी के लिए बन गया मुसीबत, 34 साल सेवा देने के बाद जारी हुआ नौकरी से निकालने का आदेश, मचा हड़कंप / Image: IBC24 Original
सिंगरौली: Third Child policy for Govt Employees दो बच्चे मीठी खीर…तीसरा बच्चा बवासीर ये लाइन तो आपने पंचायत बेव सीरीज में देखी और सुनी होगी। पंचायत में इस लाइन को लेकर जमकर बवाल मचा था, हालांकि ये लाइन गांव के लोगों को जागरूक करने के लिए दीवार पर लिखवाया गया था। लेकिन मध्यप्रदेश में तीसरे बच्चे के चलते एक अधिकारी को अपनी नौकरी गंवानी पड़ गई। अधिकारी को नौकरी से निकाले जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। बता दें कि मध्यप्रदेश में तीसरे बच्चे के चलते नौकरी से निकाले जाने का ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, अन्य विभागों के कई अधिकारी / कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीन संतान होने की शिकायतों की जांच चल रही है।
Third Child policy for Govt Employees मिली जानकारी के अनुसार सिंगरौली जिले में लंबे समय से पदस्थ पंजीयक विभाग के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार की सेवा शासन द्वारा समाप्त कर दी गई है। उनके ऊपर आरोप लगा था कि वह तीन संतान होने की जानकारी को छिपाकर नौकरी कर रहे थे। शिकायत की जांच हुई तो मामला सही पाया गया, उसके बाद कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक भोपाल द्वारा आदेश जारी कर उप पंजीयक को बर्खास्त कर उनकी सेवा को समाप्त कर दिया गया है।
वहीं, उप पंजीयक के खिलाफ कार्रवाई होने से जिले के सरकारी महकमों में हड़कंप की स्थिति निर्मित रही, क्योंकि जिले में कई अन्य विभागों के अधिकारी / कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीन संतान होने की शिकायतों की जांच चल रही है। शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य जैसे विभागों में कई अधिकारी/ कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीसरी संतान 2003 के बाद पैदा हुई। शासन का नियम है कि साल 2003 के पहले से जो नौकरी मे हैं और उसके बाद तीसरी संतान हुई तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।
मामले की जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।
जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।
बता दें कि, एमपी से पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं जहां, तीसरी संतान होने के चलते कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था। रहमत बानो मंसूरी, जिन्हें तीसरी संतान होने के कारण सरकारी शिक्षिका पद से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, रहमत बानो ने आरोप लगाया कि था उनके ही ब्लॉक में ऐसे 34 शिक्षक हैं जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उनके खिलाफ हुई।