उत्तराखंड: अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता का निर्धारण जिला स्तरीय शिक्षा समिति करेगी, मिली मंजूरी

उत्तराखंड: अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता का निर्धारण जिला स्तरीय शिक्षा समिति करेगी, मिली मंजूरी

उत्तराखंड: अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता का निर्धारण जिला स्तरीय शिक्षा समिति करेगी, मिली मंजूरी
Modified Date: April 30, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: April 30, 2026 8:52 pm IST

देहरादून, 30 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने बृहस्पतिवार को आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई कराने वाली अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता का निर्धारण जिला स्तरीय शिक्षा समिति द्वारा किए जाने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।

मंत्रिमंडल ने इसके अलावा हरिद्वार में अगले वर्ष होने वाले अर्धकुंभ मेले के निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने और वन क्षेत्रों की सीमा पर मौनपालन नीति को भी मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2025 में अधिसूचित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत पहली से 12वीं कक्षा तक के संस्थानों को रामनगर स्थित विद्यालयी शिक्षा परिषद से संबद्धता लेने का प्रावधान किया गया था।

प्रदेश में संचालित 452 मदरसों में से 400 से अधिक में पहली से आठवीं कक्षा तक की ही पढ़ाई होती है और इन संस्थानों की ओर से किए गए अनुरोध को देखते हुए मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया कि कक्षा आठ तक संचालित अल्पसंख्यक संस्थाओं की संबद्धता का निर्धारण अब जिला स्तरीय शिक्षा समिति या सरकार द्वारा नामित सक्षम अधिकारी करेंगे।

हालांकि, नौवीं से 12वीं कक्षा तक संचालित संस्थाओं को पूर्व की भांति विद्यालयी शिक्षा परिषद, रामनगर से ही संबद्धता लेनी होगी।

इस संबंध में अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम में अध्यादेश लाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है।

यह अधिनियम जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।

एक अन्य निर्णय में मंत्रिमंडल ने हरिद्वार अर्धकुंभ-2027 के लिए स्थायी और अस्थायी निर्माण कार्यों की स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक करोड़ रुपये तक के कार्यों की मंजूरी मेलाधिकारी को देने तथा पांच करोड़ रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति गढ़वाल मंडल आयुक्त को देने का निर्णय लिया।

इसके अलावा पांच करोड़ रुपये से अधिक के कार्य पूर्व की भांति राज्य सरकार की मंजूरी से ही होंगे।

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली-2026 में संशोधन को भी मंजूरी दी, जिसके तहत जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का पदेन सदस्य बनाया जाएगा।

मंत्रिमंडल ने साथ ही तेजाब हमला पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सेवाओं के दायरे में शामिल किया है।

इसके अलावा, वन क्षेत्रों की सीमा पर मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड मौन पालन (मधुमक्खी) नीति को मंजूरी दी गई।

इस नीति का उद्देश्य स्वरोजगार को बढ़ावा देना, लोगों की आय में वृद्धि करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष, विशेषकर हाथियों से होने वाले नुकसान को कम करना है। राज्य का लगभग 70 प्रतिशत भूभाग वनाच्छादित है, जिससे इस क्षेत्र में मौनपालन की व्यापक संभावनाएं हैं।

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड उप खनिज परिहार नियमावली-2023 में संशोधन करते हुए रॉयल्टी दर को सात रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर आठ रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया।

इसके साथ ही परिवहन विभाग को 250 बसों की खरीद के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

भाषा दीप्ति जितेंद्र

जितेंद्र


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