उत्तराखंड : हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर लग सकता है प्रतिबंध
उत्तराखंड : हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर लग सकता है प्रतिबंध
देहरादून, छह जनवरी (भाषा) उत्तराखंड सरकार हरिद्वार कुंभ क्षेत्र के सभी धार्मिक स्थानों और गंगा घाटों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा सकती है।
आधिकारिक सूत्रों ने यहां मंगलवार को बताया कि इसकी कवायद चल रही है जिसके तहत हरिद्वार-ऋषिकेश के नगर निगम क्षेत्रों सहित पूरे कुंभ क्षेत्र को पवित्र सनातन नगरी घोषित किया जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि इस क्षेत्र में आने वाले सभी धार्मिक स्थानों तथा कुल 105 गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
हरिद्वार में हर की पौड़ी तथा आसपास के गंगा घाटों का प्रबंधन देखने वाली श्री गंगा सभा द्वारा हाल में इस संबंध में मांग उठायी गयी थी जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस संबंध में संकेत दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार, मां गंगा और साधु संतों का पूज्य स्थान है और वहां से इस संबंध में उठी मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार क्षेत्र की पवित्रता, देवत्व और मान्यताओं को बनाए रखने के लिए सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है तथा इस संबंध में पुराने अधिनियमों को भी देखा जा रहा है।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि जब सनातन हिंदुओं की आस्था के आधार पर इस क्षेत्र को ‘कुंभ क्षेत्र’ का नाम दिया गया है तो उसे हिंदू क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए तथा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी धार्मिक स्थलों और गंगा घाटों पर पूरी तरह से गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करना चाहिए ताकि हिंदू अपने पूजा अनुष्ठान अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप कर सकें।
गौतम ने इस संबंध में 100 साल से भी अधिक समय पहले 1916 में बनाए गए हरिद्वार नगरपालिका के नियमों का भी हवाला दिया जिसमें हर की पौड़ी के चारों ओर सात-आठ किलोमीटर के पूरे क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था।
कुंभ मेला क्षेत्र में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग का कुछ साधु संतों ने समर्थन भी किया है।
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य सरकार के इस प्रस्तावित कदम को गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ बताया।
धस्माना ने कहा, ”कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने की कोई जरूरत ही नहीं है क्योंकि वहां केवल हिंदुओं का ही जमावड़ा होता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम 2027 विधानसभा चुनावों से पहले वोटों का ध्रुवीकरण कर सत्ता हथियाने की एक कोशिश है।
भाषा
दीप्ति रवि कांत

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