उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बागेश्वर में अवैघ खड़िया खनन पर सुनवाई जारी

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बागेश्वर में अवैघ खड़िया खनन पर सुनवाई जारी

उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बागेश्वर में अवैघ खड़िया खनन पर सुनवाई जारी
Modified Date: January 6, 2026 / 12:15 am IST
Published Date: January 6, 2026 12:15 am IST

नैनीताल, पांच जनवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय में बागेश्वर जिले की कांडा तहसील और अन्य गांवों में अवैध सोपस्टोन (खड़िया) खनन से मकानों में पड़ी दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान जनहित याचिका तथा 165 खनन इकाइयों से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

सोमवार को सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने कहा कि सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।

आज की सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि उसने पहले ही कहा था कि उत्तराखंड में खड़िया खनन को नियंत्रित करने वाले प्रावधानों के तहत, खनन कार्यों में लगे वाहनों में जीपीएस प्रणाली लगी होनी चाहिए और इस जीपीएस प्रणाली को ‘रामन्ना पोर्टल’ के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए ताकि पोर्टल के माध्यम से वाहनों के संपूर्ण डेटा को ट्रैक किया जा सके ।

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इससे पहले, बागेश्वर जिला खनन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट में कहा गया था कि खनिज परिवहन में कई अनियमितताएं पाई गई हैं।उदाहरण के तौर पर 55 किलोमीटर की दूरी को 12 से 18 घंटे में तय करना दिखाया गया था, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं के वकील ने प्रार्थना की थी कि नियमों को ठीक तरीके से लागू किया जाए ।

अदालत ने अब निर्देश दिया है कि नियमों को एक सप्ताह के भीतर लागू किया जाए और राज्य सरकार अपने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की सहायता से एक ऐसी प्रणाली स्थापित करे जिससे पूरे राज्य में नीति का अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

कांडा तहसील के ग्रामीणों ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर अवैध खड़िया खनन के कारण हो रहे नुकसान से उन्हें अवगत कराया था ।

पत्र में कहा गया था कि खनन गतिविधियों के कारण गांवों में कृषि, मकान, जल आपूर्ति लाइनें और अन्य मूलभूत सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं ।

पत्र के अनुसार, आर्थिक रूप से संपन्न लोग हल्द्वानी तथा अन्य शहरों की ओर पलायन कर गए और अब गांवों में मुख्य रूप से गरीब और असहाय निवासी ही रह गए हैं ।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि खड़िया खनन में संलिप्त लोगों के कारण उनकी आजीविका के साधन भी खतरे में आ गए हैं ।

उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में अनेक ज्ञापन दिए गए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी ।

भाषा सं दीप्ति नोमान

नोमान


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