उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल में दूषित पानी, बीमारियों को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल में दूषित पानी, बीमारियों को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल में दूषित पानी, बीमारियों को लेकर अधिकारियों की खिंचाई की
Modified Date: September 8, 2026 / 09:24 pm IST
Published Date: September 8, 2026 9:24 pm IST

नैनीताल, आठ सितंबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जिले के ज्योलीकोट तथा आसपास के गांवों में कथित रूप से दूषित पेयजल के कारण हुई मौत तथा बीमारियों के मामले में मंगलवार को संबंधित अधिकारियों का पक्ष सुनने के बाद उन्हें प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए साफ पीने का पानी और बेहतर इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने हालात को ‘महामारी’ बताते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी को राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए। पीठ ने संबंधित सचिव को भी कुमाऊं क्षेत्र में पानी की जांच करने वाली प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने का भी निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की गयी है।

खंडपीठ ने मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत, जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता अनीश कुमार और मुख्य अभियंता आलोक की बात सुनी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील रवि बिष्ट ने अदालत के सामने 10 से अधिक चिकित्सीय रिपोर्ट पेश की।

अदालत ने स्थिति पर चिंता जतायी और अधिकारियों से कहा कि वे सिर्फ अपनी जांच पर निर्भर रहने के बजाय, निजी प्रयोगशालाओं से भी पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच करवाएं।

चिकित्सीय सुविधाओं के मुद्दे पर अदालत ने कहा कि अगर स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं, तो अधिकारियों को बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सक बुलाने चाहिए। पीठ ने जल संस्थान और पेयजल निगम से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सीवेज और पेयजल की आपूर्ति आपस में न मिलें।

उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि नैनीताल शहर में पानी की गुणवत्ता और सीवेज लीकेज की जांच की जाए। अदालत ने इसके लिए 20 से 25 अलग-अलग जगहों से पानी के नमूने लेने को कहा।

डॉ रश्मि पंत ने उच्च न्यायालय को बताया कि बीमारी के लिए दूषित जल जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया जाएगा, जबकि जिला प्रशासन निवासियों की जांच की सुविधा उपलब्ध कराएगा।

उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि सात गांवों में मेडिकल टीम तैनात की गई है जो घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस बांटेंगीं। उन्होंने बताया कि प्रभावित इलाके में आठ डॉक्टर और एक एम्बुलेंस भी तैनात की गई है।

जल संस्थान के अधिकारियों ने अदालत को बताया कि पानी के स्रोतों से जांच शुरू कर दी गई है और ‘क्लोरीनेशन’ (क्लोरीन का उपयोग करके पानी को कीटाणुमुक्त करने) का काम भी किया जा रहा है।

याचिका में बेलुवाखान, ज्योलीकोट, गेठिया, सरियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी, छीना और आसपास के गांवों में जलजनित बीमारियों के फैलने का मुद्दा उठाते हुए कहा गया था कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में पीलिया के मामले सामने आए हैं जबकि 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की हाल में हुई मौत से भी क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

भाषा सं दीप्ति सुरभि

सुरभि


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