उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेदखली आदेश रद्द किया : कहा अनुसूचित आयोग आदेश नहीं दे सकता

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेदखली आदेश रद्द किया : कहा अनुसूचित आयोग आदेश नहीं दे सकता

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बेदखली आदेश रद्द किया : कहा अनुसूचित आयोग आदेश नहीं दे सकता
Modified Date: March 23, 2026 / 09:43 pm IST
Published Date: March 23, 2026 9:43 pm IST

नैनीताल, 23 मार्च (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जमीन से बेदखल किए जाने के राज्य अनुसूचित जाति आयोग के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि उसके पास सिफारिशें करने की शक्ति है, लेकिन बाध्यकारी आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने राजेंद्र प्रसाद कबटियाल द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया।

याचिका में उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग के मई 2024 के उस आदेश को चुनौती दी गयी थी जिसमें उसने राज्य के अधिकारियों को याचिकाकर्ता को एक भूखंड से बेदखल करने का निर्देश दिया था।

आयोग की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा कथित रूप से भूमि पर अनाधिकृत कब्जा किए जाने के संबंध में साक्ष्य एकत्र किए गए थे और उसके आधार पर यह निर्देश जारी किया गया था।

आयोग ने हालांकि, यह भी माना कि वह केवल कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है और उसे सीधे बेदखली का आदेश देने का अधिकार नहीं है।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि आयोग ने ऐसा आदेश जारी करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि उत्तराखंड अनुसूचित जाति आयोग केवल सिफारिश करने वाला निकाय है और उसे भूमि से बेदखली जैसे निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं है।

उच्च न्यायालय ने आयोग के आदेश को रद्द करते हुए दोनों पक्षों को कानून के तहत उपलब्ध वैकल्पिक उपायों का लाभ उठाने की स्वतंत्रता प्रदान की।

भाषा सं दीप्ति धीरज

धीरज


लेखक के बारे में