उत्तराखंड: उच्च न्यायालय ने बिना सबूत आरोपी को दोषी ठहराए जाने के फैसले को पलटा, जमानत दी
उत्तराखंड: उच्च न्यायालय ने बिना सबूत आरोपी को दोषी ठहराए जाने के फैसले को पलटा, जमानत दी
नैनीताल, 28 अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) से संबंधित एक मामले में बिना सबूत के एक आरोपी को दोषी ठहराए जाने के अधीनस्थ न्यायालय के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई और आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेन्द्र और न्यायमूर्ति आलोक माहरा की खंडपीठ ने आरोपी रामपाल द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अधीनस्थ न्यायालय के फैसले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अपर्याप्त सबूत का मामला नहीं बल्कि सबूत न होने का मामला है।
उत्तरकाशी जिले के जखोले गांव में रहने वाले रामपाल नाम के व्यक्ति को एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर भगा ले जाने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में जनवरी 2022 में गिरफ्तार किया गया था।
उत्तरकाशी के विशेष सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और पॉक्सो अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए 18 जनवरी 2024 को उसे 20 साल के कारावास की सजा सुनाई और उस पर जुर्माना लगाया था।
उच्च न्यायालय ने 17 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि पुलिस और अभियोजन पक्ष यह पता लगाने में भी विफल रहे कि कथित अपराध कहां हुआ था।
अदालत ने कहा कि पीड़िता 23 जनवरी, 2022 को आराकोट बाजार पुल के पास आरोपी के साथ पाई गई लेकिन किसी मकान, इमारत या होटल जैसे किसी स्थान का कभी कोई सबूत पेश नहीं किया गया, जहां कथित तौर पर अपराध हुआ था।
पीठ ने कहा कि मामले में किसी प्रत्यक्षदर्शी की कोई गवाही भी नहीं हुई।
अदालत ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में बताया गया कि पीड़िता के शरीर या जननांगों पर कोई चोट, सूजन या घाव नहीं था और उसका चिकित्सा परीक्षण करने वाले चिकित्सक ने जबरदस्ती यौन संबंध बनाने का कोई निशान रिपोर्ट में नहीं दर्ज किया।
पीठ ने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को आश्चर्यजनक बताया और कहा कि उसने ऐसे दस्तावेज पर भरोसा किया, जो रिकॉर्ड का हिस्सा भी नहीं था।
पीड़िता ने अदालत में आरोपी के खिलाफ आरोपों को नहीं दोहराया लेकिन इसके बावजूद अधीनस्थ न्यायालय ने उसे दोषी मान लिया।
उच्च न्यायालय ने पाया कि अधीनस्थ न्यायालय ने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज पीड़िता के बयान पर भरोसा किया जबकि वह बयान कभी प्रदर्शित नहीं किया गया या रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया।
पीठ ने कहा कि इसके अलावा पीड़िता ने अपनी गवाही में आरोपी के साथ किसी भी तरह का शारीरिक संबंध होने से साफ इनकार किया था।
भाषा सं दीप्ति जितेंद्र
जितेंद्र

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