उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की गिरफतारी पर रोक लगायी
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ की गिरफतारी पर रोक लगायी
नैनीताल, छह जनवरी (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया पर मानहानि करने वाली सामग्री को प्रसारित करने के आरोप में राज्य के विभिन्न जिलों में पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ के खिलाफ दर्ज अनेक प्राथमिकियों को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर मंगलवार को उन्हें ‘अंतरिम संरक्षण’ प्रदान कर दिया।
राठौड़ ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में हरिद्वार जिले में 24 दिसंबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 248(बी) (नुकसान पहुंचाने के मकसद से झूठा आरोप लगाना), 3(5) (सामान्य आशय) और 336(4) (प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के मकसद से जालजासी) के तहत अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त किए जाने की प्रार्थना की थी ।
याचिका में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ता और एक अन्य आरोपी ने शिरोमणि गुरु रविदास शिव महापीठ के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष दुष्यंत कुमार गौतम की सामाजिक छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से जानबूझकर सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक सामग्री फैलाई । यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसी सामग्री से रविदास समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंची और शत्रुतापूर्ण माहौल पैदा हुआ।
याचिकाकर्ता ने हालांकि सभी आरोपों को गलत बताते हुए दावा किया कि वह निर्दोष हैं और राजनीतिक प्रतिशोध के कारण उन्हें फंसाया जा रहा है।
राठौड़ ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी भी सोशल मीडिया मंच पर मानहानि वाला कोई भी ऑडियो या वीडियो साझा या प्रसारित नहीं किया है और शिकायतकर्ता के साथ उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है ।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि सह-आरोपी उर्मिला उनकी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है और वायरल हुई सामग्री उनकी भागीदारी के बिना कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके तैयार की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया कि इसी प्रकार के आरोपों वाली दो और प्राथमिकियां हरिद्वार और देहरादून जिलों में दर्ज की गयी है जो विधि प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के बराबर हैं ।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में पेश अधिवक्ता वैभव चौहान ने दलील दी कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 248(बी) और 336(4) के तहत अपराध नहीं बनता क्योंकि याचिकाकर्ता ने न तो कोई झूठी आपराधिक कार्यवाही शुरू की और न ही जालसाजी का कोई कार्य किया।
याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दलीलों और गिरफ्तारी की आशंका को ध्यान में रखते हुए, न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ ने राठौड़ को ‘अंतरिम संरक्षण’ प्रदान कर दिया तथा प्राथमिकी में उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने का भी निर्देश दिया है ।
भाषा सं दीप्ति नोमान
नोमान

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