उत्तराखंड : दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता छात्रा का अब तक कोई सुराग नहीं

उत्तराखंड : दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता छात्रा का अब तक कोई सुराग नहीं

उत्तराखंड : दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता छात्रा का अब तक कोई सुराग नहीं
Modified Date: June 3, 2026 / 03:35 pm IST
Published Date: June 3, 2026 3:35 pm IST

उत्तरकाशी, तीन जून (भाषा) उत्तराखंड में उत्तरकाशी के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रैक से पांच दिन पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुई 23 वर्षीय एमबीए छात्रा का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है और परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने उसके दो साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

इस बीच, यह भी खुलासा हुआ है कि नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबिता पांडे और उसके साथियों को ट्रेकिंग पर भेजने के लिए परमिट में धोखाधड़ी की गयी जिसके बाद संबंधित ट्रेकिंग एजेंसी—प्रो माउंटेन का पंजीकरण तत्काल निलंबित कर दिया गया ।

अधिकारियों ने बताया कि बबिता, अपने दो साथियों—उधमसिंह नगर जिले के हरमनपाल सिंह तथा उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी हरमनप्रीत सिंह के साथ उत्तरकाशी गयी थी जहां हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थल घूमने के बाद 28 मई को वे रैथल गांव में रूके।

सीसीटीवी कैमरों में बबिता को इन दोनों मित्रों के साथ आखिरी बार रैथल गांव में देखा गया ।

इसके बाद, 29 मई को तीनों मित्रों ने रेथल से दयारा बुग्याल के लिए अपनी ट्रेकिंग शुरू की और रात में गोई बेस कैंप पर रुके। इसी कैंप से 29 मई की मध्यरात्रि के आसपास बबिता पांडे रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं।

अधिकारियों के मुताबिक, तीस मई को बबिता के लापता होने की सूचना मिलने के बाद सेना, भारत—तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन की 150—सदस्यीय संयुक्त टीम उसे ढूंढने में लगी है ।

हालांकि, पांच किलोमीटर के दायरे में घने जंगलों, खड़ी ढलानों, ट्रेकिंग रूटों और गुफाओं के अंदर मैनुअल, खोजी कुत्तों और ड्रोन की मदद से तलाश के बाद भी कोई सुराग न मिलने के बाद अब निगाहें गोई कैंप स्थल के पास स्थित एक झील पर टिक गयी है ।

अधिकारियों ने बताया कि एसडीआरएफ की छह सदस्यीय गोताखोरों की विशेष टीम को आधुनिक उपकरणों के साथ झील की गहराइयों को खंगालने के लिए बुलाया गया है ।

उत्तरकाशी की पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने बताया कि बबिता के परिजनों के उत्तरकाशी पहुंचने के बाद पुलिस ने उसके दोनों साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है तथा उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है ।

उन्होंने बताया कि पुलिस इस मामले में आपसी अनबन या कोई अन्य संदिग्ध गतिविधि सहित हर कोण से जांच कर रही है । ट्रेकिंग गाइड और एजेंसी से जुड़े अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

इस बीच, उत्तरकाशी के जिला पर्यटन अधिकारी के के जोशी ने बताया कि घटना की छानबीन के दौरान खुलासा हुआ कि पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पर बबिता पांडे या उनके साथियों के नाम का कोई वैध डिजिटल परमिट नहीं है ।

जांच में पता चला कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के माध्यम से ये लोग गए थे, उसने सरकार के राजस्व और निर्धारित 150 ट्रेकर्स प्रतिदिन की अनुमति के नियम को दरकिनार करने के लिए एक पुराने फिजिकल परमिट पर बबिता और उसके दोस्तों के नाम चिपका दिए। चेकपोस्ट पर जब उसका क्यूआर कोड स्कैन किया गया, तो वह पुराने ट्रेकर्स का डेटा दिखा रहा था।

जोशी के मुताबिक, फर्जीवाड़े के कारण बचाव दलों को पहले यह समझने में देरी हुई कि ट्रेकिंग पर कौन गया था और किस एजेंसी के माध्यम से गया था। पर्यटन विभाग ने धोखाधड़ी के लिए रैथल में स्थित ट्रेकिंग एजेंसी—प्रो माउंटने का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

भाषा सं दीप्ति मनीषा रंजन

रंजन


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