उत्तराखंड एसआईआर : नाम और उम्र में गड़बड़ी के कारण मतदाता लगा रहे शिकायत निवारण केंद्रों के चक्कर
उत्तराखंड एसआईआर : नाम और उम्र में गड़बड़ी के कारण मतदाता लगा रहे शिकायत निवारण केंद्रों के चक्कर
(ध्रुव मिश्रा)
देहरादून, पांच अगस्त (भाषा) उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लगभग 19.3 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जिसकी वजह से कई लोग नाम, उम्र और परिवार की जानकारी में गलतियों को ठीक करवाने के लिए शिकायत निवारण केंद्रों के चक्कर लगा रहे हैं।
विपक्षी दल कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
देहरादून के रायपुर शिकायत निवारण केंद्र पर पहुंचे कई मतदाताओं ने बताया कि उन्हें नाम की वर्तनी में गलती, गलत उम्र और सरकारी दस्तावेजों में परिवार की जानकारी में अंतर के कारण नोटिस मिले हैं।
विशुका शेरपा ने बताया कि उनके परिवार को नोटिस इसलिए मिला क्योंकि उनके पिता का नाम मतदाता सूची में होने के बावजूद अलग-अलग रिकॉर्ड में उनके नाम की वर्तनी में अंतर था।
अलीशा ने कहा कि छोटी-छोटी गलतियों के लिए भी नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘नाम के एक अक्षर में भी अंतर होने पर नोटिस भेजे गए हैं। नतीजतन, अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं।’’
भूपेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि मतदाता सूची में उनके और उनकी मां की उम्र में केवल 15 साल का अंतर दिखाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत केंद्र के कई चक्कर लगाने के बावजूद गलती ठीक नहीं की गई।
शिकायत निवारण केंद्र के अधिकारियों ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक कई लोगों का जरूरी दस्तावेज पेश न कर पाना है, क्योंकि कुछ लोगों ने बाढ़, आग या अन्य दुर्घटनाओं में दस्तावेज खो दिये हैं।
केंद्र पर तैनात एक सेक्टर मजिस्ट्रेट ने कहा, ‘‘सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई लोगों ने अपने दस्तावेज खो दिए हैं। नतीजतन, वे जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं।’’
अधिकारियों ने बताया कि वर्तनी में अंतर के मामले बड़ी संख्या में सामने आए हैं, ये अंतर इसलिए हुए क्योंकि कुछ दस्तावेजों में नाम हिंदी में थे और कुछ में अंग्रेजी में, या फिर उपनाम न होने और पिता या पति के नाम की वर्तनी में अंतर के कारण ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है।
अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि 14 जुलाई को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में 71.33 लाख मतदाता शामिल थे।
उन्होंने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान पाई गई विभिन्न विसंगतियों के कारण लगभग 19.3 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं, जबकि ‘मैपिंग’ से संबंधित मुद्दों के लिए 5.5 लाख और नोटिस भी भेजे गए हैं।
जोगदंडे के अनुसार, संबंधित मतदाताओं में से लगभग 77 प्रतिशत तक नोटिस पहुंच चुके हैं और एक अगस्त से तीन सितंबर तक सभी जिलों में सुनवाई हो रही है।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कुछ मामलों में, जिन लोगों को मतदाता का नाम हटाने के लिए प्रस्तावक के तौर पर दिखाया गया, वे अपने पंजीकृत पते पर नहीं मिले।
गोदियाल ने आरोप लगाया, ‘‘जिस व्यक्ति ने किसी का वोट हटाने के लिए प्रस्तावक के तौर पर आवेदन किया, उसका नाम रिकॉर्ड में तो दिखता है, लेकिन जब उन्हें खोजने की कोशिश की जाती है, तो वे नहीं मिलते।’’
उन्होंने कहा कि पार्टी ने मैदानी इलाकों की कई विधानसभा सीटों से सामने आए ऐसे मामलों के बारे में निर्वाचन आयोग को जानकारी दी है।
हालांकि, कांग्रेस ने ऐसे किसी भी प्रस्तावक का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और न ही कोई ऐसा सबूत दिया है जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सके।
कांग्रेस के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर जोगदंडे ने कोई जवाब नहीं दिया।
कांग्रेस ने मतदाता सूचियों की जांच करने, नामों के काटे जाने पर दर्ज कराई जाने वाली आपत्तियों की निगरानी करने और नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सहायता करने के लिए यहां अपने प्रदेश मुख्यालय में एक वॉर रूम भी बनाया है।
भाषा शफीक पवनेश
पवनेश

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