उत्तराखंड: किसान आत्महत्या मामले में दो उप-निरीक्षक निलंबित, 10 अन्य पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

उत्तराखंड: किसान आत्महत्या मामले में दो उप-निरीक्षक निलंबित, 10 अन्य पुलिसकर्मी लाइन हाजिर

उत्तराखंड: किसान आत्महत्या मामले में दो उप-निरीक्षक निलंबित, 10 अन्य पुलिसकर्मी लाइन हाजिर
Modified Date: January 12, 2026 / 03:09 pm IST
Published Date: January 12, 2026 3:09 pm IST

रुद्रपुर, 12 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के किसान सुखवंत सिंह की कथित आत्महत्या के मामले में सोमवार को दो पुलिस उप-निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया, जबकि 10 अन्य पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा इस मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए जाने के एक दिन बाद यह कार्रवाई की गई है।

काशीपुर के पैगा गांव निवासी 40 वर्षीय किसान सुखवंत सिंह ने रविवार तड़के हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र स्थित एक होटल के कमरे में कथित तौर पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी।

 ⁠

ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मणिकांत मिश्रा ने बताया कि कोतवाली आईटीआई के प्रभारी उपनिरीक्षक कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और दोनों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा कोतवाली आईटीआई के अंतर्गत पुलिस चौकी पैगा में तैनात पूरे पुलिस बल को लाइन हाजिर कर दिया गया है जिनमें चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार सहित कुल 10 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं।

मिश्रा ने बताया कि सुखवंत सिंह द्वारा जमीन के नाम पर उसके साथ हुई कथित ठगी को लेकर दी गई शिकायत पर संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा गंभीर लापरवाही और उदासीनता बरते जाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

उन्होंने कहा कि जिले में किसी भी स्तर पर लापरवाही, संवेदनहीनता या कर्तव्यहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना है और इसमें किसी भी प्रकार की चूक पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सुखवंत सिंह जमीन के नाम पर स्वयं के साथ हुई कथित चार करोड़ रुपये की ठगी को लेकर लंबे समय से तनाव में थे।

पुलिस ने बताया कि घटना से पहले किसान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उसे बक्सौरा गांव में सात एकड़ जमीन दिखाई थी, लेकिन रजिस्ट्री किसी अन्य भूमि की कर दी गई।

वीडियो में किसान ने दावा किया कि इस सौदे में उससे तीन करोड़ रुपये नकद और एक करोड़ रुपये बैंक खाते के माध्यम से लिए गए। उसने उन लोगों के नाम भी बताए, जिन पर जमीन के नाम पर ठगी का आरोप लगाया गया है।

सिंह ने वीडियो में यह भी कहा कि उसने इस संबंध में ऊधमसिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मृतक किसान के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की थी और कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश देते हुए कहा था कि इस दुखद घटना के सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या दोष पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत किसान के परिजनों को भरोसा दिलाया कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है और प्रशासन को पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

भाषा सं दीप्ति

मनीषा खारी

खारी


लेखक के बारे में