शिमला, एक मई (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मांग की है कि हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य के मंदिरों का नियंत्रण हिंदू समुदाय को सौंपे।
यहां बृहस्पतिवार को आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने आरोप लगाया कि जहां अन्य धर्मों के पूजा स्थलों का प्रबंधन संबंधित समुदायों द्वारा किया जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश के 37 प्रमुख मंदिर अब भी सरकार के नियंत्रण में हैं।
इसे धार्मिक असमानता करार देते हुए उन्होंने मांग की कि इन मंदिरों का प्रबंधन हिंदू समुदाय को सौंपा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मंदिरों की आय हर वर्ष सैकड़ों करोड़ रुपये में होती है। इस राशि का उपयोग केवल धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यों के लिए होना चाहिए, न कि प्रशासनिक खर्चों के लिए।”
परांडे ने कहा कि इन मंदिरों में हर वर्ष 200 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा आता है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में आस्था रखने वाले श्रद्धालु मंदिरों के विकास, लंगर, सेवा और अन्य कार्यों के लिए दान देते हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में इन 37 मंदिरों की वार्षिक आय 200.59 करोड़ रुपये रही, जबकि इनके पास 346.26 करोड़ रुपये की सावधि जमा (एफडी) है। ‘‘मंदिरों के खजाने में पर्याप्त मात्रा में सोना और चांदी भी है।’’
उन्होंने कथित ‘लैंड जिहाद’ को लेकर भी चिंता जताई और दावा किया कि राज्य के कई क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण हो रहे हैं, जिन पर तत्काल सख्ती से कार्रवाई की जानी चाहिए।
हिमाचल प्रदेश में कथित ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती है तो संगठन व्यापक जनजागरूकता अभियान और आंदोलन शुरू करेगा।
भाषा मनीषा अविनाश
अविनाश