अधिकारी ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाएं : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

अधिकारी ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाएं : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

अधिकारी ‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाएं : उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
Modified Date: August 20, 2026 / 07:05 pm IST
Published Date: August 20, 2026 7:05 pm IST

देहरादून, 20 अगस्त (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को अधिकारियों को ‘‘सेवाभाव और कर्तव्यबोध’’ को अपना मार्गदर्शक मंत्र बनाने का आह्वान करते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके हर प्रयास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और विकास समावेशी हो।

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में 2024 बैच के प्रशिक्षु आईएएस अधिकारियों के प्रशिक्षण के दूसरे चरण के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने यह बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि सिविल सेवाओं ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वे नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाती हैं।

‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि उनके द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक विकास प्रयास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों से व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय सामूहिक प्रयासों पर बल देने का आह्वान किया। उन्होंने सशक्त और समन्वित टीम के निर्माण, सहयोगियों को प्रेरित करने तथा अपने पूर्ववर्तियों द्वारा स्थापित अच्छी कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी जोर दिया।

सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि 2024 बैच में लगभग 41 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं। उन्होंने इसे ‘‘नारी शक्ति’’ का प्रभावशाली प्रमाण बताते हुए कहा कि प्रतिभा रूढ़ धारणाओं से ऊपर उठती है और दृढ़ संकल्प के साथ बाधाओं को पार करती है।

उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और नागरिक सेवाओं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ‘नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन’ जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने निरंतर सीखने, बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने और भविष्य के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया।

लोक सेवा की आधारशिला के रूप में चरित्र और सत्यनिष्ठा के महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्चे नेतृत्व का आकलन शक्ति या पद से नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक रूप से कार्य करने की क्षमता से होता है।

इस मौके पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह भी मौजूद रहे।

भाषा दीप्ति शफीक

शफीक


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