विजयन ने मंजूरी के बिना बंदरगाह संबंधी हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर अदाणी समूह पर निशाना साधा
विजयन ने मंजूरी के बिना बंदरगाह संबंधी हिस्सेदारी हस्तांतरण को लेकर अदाणी समूह पर निशाना साधा
तिरुवनंतपुरम, दो जुलाई (भाषा) केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने बृहस्पतिवार को सवाल उठाया कि राज्य सरकार की अनिवार्य पूर्व अनुमति के बिना अदाणी समूह ने विड़िण्गम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह में अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का समझौता करने का ‘‘साहस’’ कैसे किया।
विजयन ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बंदरगाह को लेकर कंपनी और राज्य सरकार के बीच हुए समझौते के अनुसार, राज्य प्रशासन की पूर्व अनुमति के अधीन ही अदाणी विड़िण्गम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (एवीपीपीएल) में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री की अनुमति है।
हालांकि, विड़िण्गम बंदरगाह की ‘कंसेशन-होल्डर’ कंपनी एवीपीपीएल ने राज्य सरकार की ऐसी पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना ही 13,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अपनी 49 प्रतिशत हिस्सेदारी दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कंपनी, स्विट्जरलैंड की मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी (एमएससी) को हस्तांतरित करने का समझौता कर लिया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता ने कहा, ‘‘वे ऐसा करने का साहस कैसे कर सकते हैं? मुख्यमंत्री वी डी सतीशन को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए, क्योंकि उनके पास बंदरगाह विभाग का भी प्रभार है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘हिस्सेदारी हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करना गैर कानूनी है और यह सरकार के साथ हुए समझौते का उल्लंघन है। अदाणी समूह के इस कदम के मद्देनजर सरकार क्या कार्रवाई करने जा रही है, इस पर भी मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए।’’
मंगलवार को ‘अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन’ (एपीएसईजेड) ने घोषणा की थी कि एमएससी, एवीपीपीएल में लगभग 1.4 अरब अमेरिकी डॉलर में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदेगी।
विजयन ने कहा कि भले ही कुछ लोग इसे राज्य में बड़े विदेशी निवेश के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन असल में यह अदाणी समूह की मुनाफ़ा कमाने की कोशिश है और इससे एमएससी का बंदरगाह पर एकाधिकार हो सकता है।
उन्होंने दावा किया कि यह कदम केरल के हितों के खिलाफ है, क्योंकि इससे राज्य और सरकार को राजस्व का नुकसान होगा।
केरल विधानसभा में एक दिन पहले हिस्सेदारी हस्तांतरण का मुद्दा उठाया गया था और सतीशन ने दावा किया था कि अदाणी पोर्ट्स ने इस मामले में राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी है।
भाषा आशीष नेत्रपाल
नेत्रपाल

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