पिछले 12 वर्ष में गांवों के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ: प्रधानमंत्री मोदी

पिछले 12 वर्ष में गांवों के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ: प्रधानमंत्री मोदी

पिछले 12 वर्ष में गांवों के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ: प्रधानमंत्री मोदी
Modified Date: September 25, 2026 / 10:48 am IST
Published Date: September 25, 2026 10:48 am IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पिछले 12 वर्ष में भारत में शहरों और गांवों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है।

मोदी ने वाराणसी से वडनगर जा रही ‘सेवा यात्रा’ मोटरसाइकिल रैली के प्रतिभागियों से कहा कि 2014 में उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद से देश की महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 12 वर्ष में भारत में शहरों और गांवों के बीच का अंतर काफी कम हुआ है। गांवों के बुनियादी ढांचे में आज उल्लेखनीय सुधार हुआ है।’’

प्रधानमंत्री ने प्रतिभागियों से कहा कि केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि समाज में निरंतर सुधार और सकारात्मक बदलाव के लिए काम करना चाहिए।

मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर 17 सितंबर को वडनगर और वाराणसी से दो मोटरसाइकिल रैली को रवाना किया गया था और इनका समापन सात अक्टूबर को होगा।

वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर तक निकाली जा रही ये मोटरसाइकिल रैलियां मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष पूरा करने के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही हैं।

गुजरात का वडनगर मोदी का जन्मस्थान है, जबकि उत्तर प्रदेश का वाराणसी 2014 से उनका लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है।

दोनों रैलियां सेवा की भावना को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से विभिन्न कस्बों, जिलों और गांवों से होकर गुजर रही हैं।

मोदी ने कहा कि वडनगर ने उन्हें वे संस्कार दिए, जिन्होंने उनके जीवन को आकार दिया और काशी (वाराणसी) ने उन संस्कारों में सेवा के अनगिनत रंग जोड़े।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आप सभी सेवा के अनेक रंगों से इस यात्रा को समृद्ध कर रहे हैं।’’

इन दोनों मोटरसाइकिल रैलियों के जरिए सेवा, जनसंपर्क, युवाओं की भागीदारी, सामाजिक कल्याण, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामुदायिक भागीदारी जैसे जनसरोकार के विभिन्न पहलुओं को एक जमीनी क्षेत्र से दूसरे तक पहुंचाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने वडनगर से वाराणसी जा रही रैली में शामिल प्रतिभागियों से बृहस्पतिवार को बातचीत की थी।

भाषा

सिम्मी संतोष

संतोष


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