उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा: अदालत ने दंगा और चोरी करने के आरोपी की जमानत मंजूर की

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा: अदालत ने दंगा और चोरी करने के आरोपी की जमानत मंजूर की

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा: अदालत ने दंगा और चोरी करने के आरोपी की जमानत मंजूर की
Modified Date: November 29, 2022 / 08:01 pm IST
Published Date: November 16, 2020 12:54 pm IST

नयी दिल्ली, 16 नवंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान दंगा फैलाने एवं चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार एक व्यक्ति की जमानत मंजूर कर ली है।

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने 11 अप्रैल को दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए सैयद इफ्तिखार को 15,000 रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत राशि जमा करने पर जमानत दे दी।

न्यायमूर्ति कैत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता 11 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में थे, इसलिए मेरा मानना है कि उसकी जमानत मंजूर की जानी चाहिए।’’

अदालत ने उसे किसी गवाह को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करने या सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया है।

इफ्तिखार ने वकील महमूद प्राचा के जरिए मामले में जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

पुलिस ने इफ्तिखार को आग या विस्फोटक पदार्थों से एक मकान को नष्ट करने के इरादे से बदमाशी करने, दंगा करने और चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ भजनपुरा पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इफ्तिखार की दूर की नजर काफी कमजोर है और जब उसे गिरफ्तार किया गया, उस समय उसने चश्मा पहना हुआ था।

उसने कहा कि याचिकाकर्ता को सह आरोपी अली हसन के साथ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में इफ्तिखार ने चश्मा नहीं पहन रखा है।

अदालत ने कहा, ‘‘कथित घटना 24 फरवरी को रात नौ बजकर 31 मिनट 30 सेकंड पर हुई, इसलिए इस बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि इतनी कमजोर नजर वाला व्यक्ति रात में चश्मे के बिना साफ देख सकता है। इसके अलावा सीडीआर (कॉल की विस्तृत जानकारी) भी उपलब्ध नहीं है, जिससे स्थापित हो सके कि याचिकाकर्ता घटनास्थल पर मौजूद था।’’

संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों एवं प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष के अनियंत्रित हो जाने के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी को साम्प्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और करीब 200 लोग घायल हो गए थे।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश


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