नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बृहस्पतिवार को कहा कि मताधिकार खतरे में है और अब समय आ गया है कि इसे मौलिक अधिकार बनाया जाए।
उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग के कई कदमों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘कंप्रोमाइज्ड’ हैं और चुनावों में उनकी भूमिका तटस्थ पर्यवेक्षक की नहीं, बल्कि एक ‘प्लेयर’ की है।
रमेश ने कहा कि कुमार को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस विपक्ष ने फिर से दिया है और इसके दोबारा खारिज होने पर फिर नोटिस दिया जाएगा।
उनका कहना था, ‘‘विपक्ष नोटिस देता रहेगा।’’ रमेश ने कहा कि निर्वाचन आयोग इतना पक्षपाती और ‘कंप्रोमाइज़्ड’ कभी नहीं रहा, जितना ज्ञानेश कुमार के तहत है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि कुमार चुनावों में एक तटस्थ पर्यवेक्षक नहीं, बल्कि ‘प्लेयर’ हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘मेरा तो मानना है कि वक्त आ गया है कि मतदान का अधिकार मौलिक अधिकार बनना चाहिए। यदि यह मौलिक अधिकार बनता है तो आप न्याय के लिए गुहार लगा सकते हैं।’
रमेश ने इस बात का उल्लेख किया कि संविधान सभा में बहस के दौरान मताधिकार को मौलिक अधिकार बनाने के विचार पर चर्चा हुई थी और भीम राव आंबेडकर इसके पक्ष में थे।
रमेश का कहना था कि जिस तरह निर्वाचन आयोग ने काम किया है उससे यह जरूरी हो गया कि मताधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए।
उन्होंने एसआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मताधिकार खतरे में है।
रमेश ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती कि विदेशी नागरिक भारत के मतदाता नहीं हो सकते, लेकिन सवाल यह है कि एसआईआर की कवायद के बाद कितने विदेशी नागरिकों की पहचान की गई।
भाषा हक पवनेश संतोष
संतोष