‘जी राम जी’ के तहत मजदूरी दर बहुत कम, यह श्रमिकों का अपमान है: कांग्रेस

‘जी राम जी’ के तहत मजदूरी दर बहुत कम, यह श्रमिकों का अपमान है: कांग्रेस

‘जी राम जी’ के तहत मजदूरी दर बहुत कम, यह श्रमिकों का अपमान है: कांग्रेस
Modified Date: July 1, 2026 / 04:05 pm IST
Published Date: July 1, 2026 4:05 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ‘विकसित भारत-जी राम जी’ योजना के तहत श्रमिकों के लिए निर्धारित दैनिक मजदूरी दर “बेहद कम और अनुचित” है तथा यह देश के श्रमिकों का अपमान और आर्थिक दृष्टि से अविवेकपूर्ण नीति है।

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि वह इस नए कानून को निरस्त कराने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की बहाली के लिए सड़क से लेकर संसद तक अपना संघर्ष जारी रखेगी।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि नई योजना के अन्यायपूर्ण स्वरूप के अलावा श्रमिकों के लिए निर्धारित मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तक तय की गई है, जो बहुत कम है।

रमेश ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने ‘श्रमिक न्याय’ अभियान के तहत मनरेगा समेत सभी श्रमिकों के लिए 400 रुपये प्रतिदिन की राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देने का वादा किया था।

उनका कहना है, ‘‘केंद्र सरकार द्वारा गठित डॉ. अनूप सत्पथी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने वर्ष 2019 में 375 रुपये प्रतिदिन की राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने की सिफारिश की थी। उनका यह भी कहना था कि सांसद सप्तगिरि उलाका की अध्यक्षता वाली ग्रामीण विकास संबंधी संसद की स्थायी समिति ने भी लगातार मनरेगा श्रमिकों के लिए अधिक मजदूरी की सिफारिश की है।’’

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि नोएडा जैसे औद्योगिक केंद्रों में न्यूनतम मजदूरी को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शनों और ग्रामीण मजदूरी में ठहराव को देश की आर्थिक वृद्धि में एक प्रमुख बाधा माने जाने के बीच जारी यह अधिसूचना भारत के श्रमिकों का अपमान है।

उन्होंने कहा कि भारत के श्रमिकों के लिए न्यायसंगत न्यूनतम मजदूरी वही होगी, जो सत्पथी समिति की सिफारिशों को अपनाए और उसके बाद से बढ़ी महंगाई को भी समायोजित करे।

कांग्रेस सांसद सप्तगिरि उलाका ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मनरेगा एक मांग आधारित रोजगार योजना थी, जिसके तहत जितने लोगों ने रोजगार की मांग की, उसके आधार पर धन आवंटित किया जाता था। नई व्यवस्था में पहले से तय बजट के भीतर ही काम पूरा करना होगा।’

उलाका ने केंद्र सरकार से वीबी-जी राम जी अधिनियम को निरस्त करने और मनरेगा को और अधिक मजबूती के साथ लागू करने की मांग की।

केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (वीबी-जी राम जी) के तहत संशोधित मजदूरी दरों को अधिसूचित कर दिया है और नया कानून एक जुलाई से लागू हो गया।

सरकार के अनुसार, नयी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत राष्ट्रीय औसत मजदूरी बढ़कर 327.4 रुपये प्रतिदिन हो गई है जो मनरेगा के तहत पहले 298.8 रुपये प्रतिदिन थी, यानी औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि हुई है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि एक जुलाई से प्रभावी नई मजदूरी दरें सभी 34 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में बढ़ाई गई हैं।

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